प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लगातार 11वीं बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लगातार 11वीं बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अगर 40 करोड़ लोग गुलामी की बेड़ियां तोड़कर आजादी हासिल कर सकते हैं, तो जरा सोचिए कि 140 करोड़ लोगों के संकल्प से क्या हासिल किया जा सकता है। विकसित भारत के लिए लोगों के सुझावों में शासन में सुधार, त्वरित न्याय प्रणाली, पारंपरिक दवाओं को बढ़ावा देना आदि शामिल हैं। जल जीवन मिशन 15 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच चुका है। 

पीएम मोदी ने कहा कि ‘जब लालकिले से कहा जाता है कि बिजली समयसीमा में पहुंचाएंगे, तो हिंदुस्तान सो जाता है। जब ढाई करोड़ घरों में बिजली पहुंच जाती है तो सामान्य मानवी का भरोसा बढ़ जाता है। परिवार के अंदर स्वच्छता का वातावरण बन जाए, भारत में आई नई चेतना का प्रतीक हैं। तीन करोड़ परिवार ऐसे हैं जिन्हें नल से जल मिलता है। जल जीवन मिशन के तहत कम समय में 18 करोड़ परिवारों तक पानी पहुंच रहा है। दलित, पीड़ित, आदिवासी, गरीब भाई-बहन इन चीजों के अभाव में जी रहे थे। हमने प्राथमिक आवश्यकताओं को पूरा करने का जो प्रयास किया, परिणाम मिला है। लोकल फॉर वोकल का मंत्र दिया, आज वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट का माहौल बना है। भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने, ग्लोबल वार्मिंग की चिंता किए बगैर हमने काम किया है। यही देश है जहां आततायी आतंकी आकर हमें मारकर चले जाते थे, आज देश की सेना सर्जिकल स्ट्राइक करती है, सीना गर्व से चौड़ा ह जाता है।’

‘मैंने सपना देखा है कि जब देश विकसित भारत हो तो सामान्य मानविकी में सरकार का दखल कम हो। मेरे प्यारे देशवासियों, हम छोटी छोटी जरूरतों और आवश्यकताओं पर भी ध्यान देते हैं। गरीब का चूल्हा जलता रहा, गरीब के इलाज की सुविधा दी गई है। जब सैचुरेशन होता है तो जाति-धर्म का भेद नहीं होता है। लोगों के जीवन में सरकार का दखल कम हो, उसके लिए हमने कई कदम उठाए हैं। हमने देशवासियों के लिए डेढ़ हजार से ज्यादा कानूनों को खत्म कर दिया है। हमने छोटे-छोटे कानूनों से जेल जाने के प्रावधान से बाहर कर दिया है। सदियों से हमारे पास जो आपराधिक कानून थे, उन्हें आज हमने न्याय संहिता के रूप में पेश किया है। दंड नहीं न्याय को आधार बनाया है। मैं जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि हमें मिशन मोड में ईज ऑफ लिविंग के लिए कदम उठाने चाहिए।’ 

‘युवाओं को छोटी-छोटी दिक्कतों के लिए सरकार को चिट्ठी लिखनी चाहिए। सरकारें संवेदनशील है और वे जरूर कदम उठाएंगी। विकसित भारत के सपने के लिए हमें जोर लगाकर आगे बढ़ना होगा। नागरिकों के जीवन में सम्मान मिले। कभी ये कहने की नौबत न आए कि लोग कहें कि ये उसका हक था और उसे मिला नहीं।’

‘जब हम देश में सुधारों की बात करते हैं तो देश में आज तीन लाख संस्थाएं जिनमें पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम और केंद्र शासित प्रशासन जैसी तीन लाख ईकाइयां हैं। मैं आज उनसे अपील करता हूं कि अगर वे एक साल में दो सुधार करें तो हम देखते ही देखते एक साल में 25-30 लाख सुधार कर सकते हैं। इससे सामान्य मानविकी का स्तर कितना अच्छा हो जाएगा। हम हिम्मत के साथ आगे आएं। अगर हम लोगों को छोटी छोटी मुसीबतों से मुक्ति दिलाएं तो हम देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। आज देश आकांक्षाओं से भरा हुआ है। हमारा नौजवान नई ऊंचाइयों को छूना चाहता है। नए क्षेत्रों में सफलता पाना चाहता है।’ 

‘जब नीति सही होती है और नीयत सही होती है तो हम निश्चित परिणाम पाकर रहते हैं। आज देश में नए अवसर बने। दो चीजें हैं जिसने विकास को छलांग दी है। पहला है आधुनिक बुनियादी ढांचा और दूसरी तरफ सामान्य मानविकी की बाधाओं को दूर करने पर भी बल दिया है। पिछले एक दशक में अभूतपूर्व बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है। गांव-गांव में स्कूल बनाने की बात हो, रोड, बंदरगाह, रेल हो, मेडिकल कॉलेज हो, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अमृत सरोवर हो, नहरों का जाल बिछाया जा रहा है। चार करोड़ गरीबों को पक्के घर बनाने की कोशिश हो, हमारा पूर्वी भारत का इलाका बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जाना जाने लगा है। इसका सबसे बड़ा लाभ समाज के उन वर्गों को लाभ मिला है, जिनकी तरफ कोई नहीं देखता था।’

’10 साल के भीतर युवाओं के सपनों को उड़ान मिली है और उसकी चेतना में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। आज विश्व भर में देश को देखने का नजरिया बदला है। रोजगार के नए अनगिनत अवसर मिले हैं। संभावनाएँ बढ़ती गई हैं और नए मौके बन रहे हैं। मेरे देश के युवाओं को अब धीरे धीरे चलने का इरादा नहीं है। मेरे देश का नौजवान छलांग मारने के मूड में है। मैं कहना चाहूंगा कि भारत के लिए यह स्वर्णिम कालखंड है। मेरे देशवासियों को हमें यह अवसर जाने नहीं देना चाहिए और इसे पकड़कर अपने सपने को लेकर चल पड़ेंगे। हमें 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य लेकर रहेंगे।’

‘मैं एक छोटा सा उदाहरण देना चाहता हूं। पहले बैंकिंग क्षेत्र का न विस्तार होता था ना विकास होता था। बैंकिंग सेक्टर संकट में था। हमने बैंकिंग सेक्टर को विकसित बनाने के लिए कई सुधार किए। आज हमारा बैंकिंग सेक्टर मजबूत है। जब बैंक मजबूत होते हैं तो संगठित अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर करने की सबसे बड़ी ताकत बैंकिंग सेक्टर में होती है। किसान, युवा, पशुपालक, रेहड़ी-पटरी वाले लाखों लोग बैंकों से जुड़कर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहे हैं। हमारे एमएसएमई, लघु उद्योगों के लिए बैंक सबसे सहायक होते हैं। ‘

‘साथियों से दुर्भाग्य से हमारे देश में आजादी तो मिली लेकिन लोगों को एक प्रकार के माई बाप कल्चर से जूझना पड़ा। सरकार से मांगते रहे, सरकार के सामने हाथ फैलाते रहो। आज हमने गवर्नेंस के मॉडल को बदला है। आज सरकार खुद जनता के पास जाती है। सरकार खुद गैस, बिजली पानी, पहुंचाती है। सरकार खुद नौजवान के स्किल डेवलपमेंट के लिए कदम उठा रही है।’

‘विकसित भारत के लिए एक सुविचारित प्रयास हो रहा है। जब राजनीतिक नेतृत्व का दृढ़ विश्वास हो और सरकारी मशीनरी उस सपने को पूरा करने के लिए जुट जाता है और इसमें जनभागीदारी हो जाए तो निश्चित परिणाम मिलता है। जब चलता है वाली सोच होती है तो लोग जो है उसी से गुजारा कर लो। यही माहौल बन गया था। हमें इस मानसिकता को तोड़ना होगा। हमें विश्वास से भरना था। हमने उस दिशा में प्रयास किया है। लोग कहते थे कि अगली पीढ़ी का हम इंतजार क्यों करें हम तो आज का देखें। हमें जिम्मेदारी दी गई और हमने बड़े सुधार जमीन पर उतारे। गरीब हो, मिडिल क्लास हो, हमारी बढ़ती शहरी आबादी हो, युवाओं के सपने और आंकाक्षाएं हों। हमने सुधार की राह चुनी। हम देशवासियों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि हमारे सुधार चार दिन की वाहवाही के लिए नहीं है। ये किसी मजबूरी में नहीं हैं, देश को मजबूती देने के लिए है।’

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