वन अग्नि सुरक्षा
गांव-गांव पहुंचा जागरूकता संदेश
रायपुर जिले में छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अंतर्गत बारनवापारा परियोजना मंडल की रायकेरा रेंज द्वारा ग्राम सुकुलबाय में वन अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम शासकीय विद्यालय परिसर और ग्राम सभा स्थल पर हुआ, जहां विद्यार्थियों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अधिकारियों ने सरल भाषा में बताया कि जंगल में आग लगने के कारण क्या हैं, इससे पर्यावरण और आजीविका पर क्या असर पड़ता है, और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
फायर सीजन क्यों है संवेदनशील?
वन विभाग के अनुसार फरवरी से जून तक का समय फायर सीजन माना जाता है। इस दौरान:
- तापमान अधिक रहता है
- जंगल में सूखी पत्तियां जमा हो जाती हैं
- तेज हवाएं आग को तेजी से फैलाती हैं
इन्हीं कारणों से आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जो बड़े नुकसान का कारण बनती हैं।
जंगल में आग से होने वाले प्रमुख नुकसान
अधिकारियों ने ग्रामीणों को आग से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया:
- बहुमूल्य वन संपदा, पौधों और वृक्षों का नष्ट होना
- वन्यजीवों के आवास को नुकसान और उनकी मृत्यु
- मिट्टी की उर्वरता में कमी
- पर्यावरण प्रदूषण और तापमान में वृद्धि
- ग्रामीणों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव
विशेष रूप से महुआ बीनने के दौरान आग लगाने की परंपरा पर रोक लगाने की अपील की गई, क्योंकि इससे अनियंत्रित आग फैलने का खतरा रहता है।
कानून क्या कहता है?
ग्रामीणों को बताया गया कि जानबूझकर जंगल में आग लगाना दंडनीय अपराध है। Indian Forest Act 1927 की धारा 26 और 33 के तहत वन क्षेत्र में आग लगाना या क्षति पहुंचाना अपराध है, जिसमें जुर्माना और कारावास का प्रावधान है।
आग से बचाव के लिए जरूरी सुझाव
कार्यक्रम में लोगों को निम्नलिखित सावधानियां अपनाने की सलाह दी गई:
- जंगल में बीड़ी, सिगरेट या जलती वस्तु न फेंकें
- महुआ या तेंदूपत्ता संग्रह के दौरान आग का प्रयोग न करें
- सूखी पत्तियों की सफाई के लिए विभाग को सूचना दें
- संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत वन विभाग को जानकारी दें
- फायर लाइन निर्माण और सफाई कार्य में सहयोग करें
संरक्षण की सामूहिक शपथ
कार्यक्रम के अंत में सभी ग्रामीणों, विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों ने वन संरक्षण की शपथ ली। संदेश स्पष्ट था—“वन हमारी साझा धरोहर है।”
यदि ग्रामवासी और वन विभाग मिलकर समय पर सूचना दें, जागरूकता फैलाएं और फायर सीजन में सतर्क रहें, तो जंगल में आग की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।