हाथ-पैरों में झुनझुनी और कमजोरी? कहीं आप भी तो नहीं बन रहे इस साइलेंट बीमारी का शिकार?

 आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलते लाइफस्टाइल के बीच लोग अक्सर थकान और कमजोरी महसूस करते हैं। हम इसे सामान्य काम का दबाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का साइलेंट संकेत हो सकता है।

हाल ही में इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक चौंकाने वाली स्टडी के अनुसार उत्तर भारत के लगभग 45 प्रतिशत से ज्यादा लोग विटामिन B12 की कमी का शिकार हैं। यह एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे शरीर को खोखला कर देती है और समय पर पहचान न होने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है।

क्यों जरूरी है शरीर के लिए विटामिन B12

विटामिन B12 हमारे शरीर के सुचारू संचालन के लिए अनिवार्य है। यह मुख्य रूप से रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह हमारे नर्वस सिस्टम को मजबूत रखने और जो हम खाना खाते हैं उसे ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। जब शरीर में इसकी कमी होती है तो कोशिकाएं पर्याप्त ऊर्जा नहीं बना पाती जिससे इंसान हर समय थका-थका महसूस करता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

विटामिन B12 की कमी के शुरुआती लक्षण काफी सामान्य होते हैं इसलिए लोग इन्हें पहचान नहीं पाते। हमेशा थकान रहना, किसी काम में ध्यान न लगना और चलते समय हल्की सांस फूलना इसके शुरुआती संकेत हैं। हालांकि यदि इसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो समस्या बढ़कर हाथ-पैरों में झुनझुनी, याददाश्त का कमजोर होना और शरीर का संतुलन बिगड़ने तक पहुंच सकती है। जानकारी के अनुसार यह स्थिति स्थायी न्यूरोलॉजिकल नुकसान भी पहुंचा सकती है।

क्यों है शाकाहारियों को ज्यादा खतरा

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि शाकाहारी लोगों में यह समस्या कहीं अधिक देखी जाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि विटामिन B12 प्राकृतिक रूप से केवल एनिमल-बेस्ड यानी मांसाहारी खाद्य पदार्थों में ही पाया जाता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ शरीर की विटामिन सोखने की क्षमता कम हो जाती है और कुछ दवाओं के लंबे इस्तेमाल से भी यह कमी हो सकती है।

कैसे करें बचाव

अपनी डाइट में सुधार करके इस कमी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। मांसाहारी लोगों के लिए अंडे, मछली और चिकन इसके बेहतरीन स्रोत हैं। वहीं, शाकाहारी लोगों को सलाह दी जाती है कि वे दूध, दही और पनीर का नियमित सेवन करें। इसके साथ ही फोर्टिफाइड सीरियल्स और प्लांट-बेस्ड मिल्क (सोया या बादाम दूध) भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, यदि कमी बहुत अधिक है, तो केवल भोजन काफी नहीं होता; ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन लेना अनिवार्य हो जाता है।

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