Zee News जुर्माना
मीडिया जगत में एक अहम फैसला सामने आया है। News Broadcasting and Digital Standards Authority (NBDSA) ने Zee News पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। मामला एक ऐसे वीडियो से जुड़ा है जिसे चैनल ने “नमाज़ से हाईवे जाम” बताकर प्रसारित किया था। जांच में पाया गया कि यह दावा भ्रामक और अधूरा था।
यह फैसला 17 फरवरी 2026 को सुनाया गया और इसे फर्जी रिपोर्टिंग के खिलाफ बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
4 मार्च 2025 को प्राइमटाइम शो में एक वीडियो दिखाया गया।
चैनल का दावा था कि:
- जम्मू-कश्मीर के रामबन इलाके में
- एक मुस्लिम ट्रक ड्राइवर ने ट्रक की छत पर नमाज़ पढ़ी
- जिसकी वजह से श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लंबा जाम लग गया
रिपोर्ट का शीर्षक था:
- “ट्रक पर नमाज़, हाईवे किया जाम”
- “खड़ी रही गाड़ियां, लोग हुए परेशान”
वीडियो को बार-बार चलाकर इसे सांप्रदायिक एंगल देने की कोशिश की गई।
असल सच्चाई क्या थी?
फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म Alt News के सह-संस्थापक Mohammed Zubair ने उसी दिन सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि:
- हाईवे पर जाम खराब मौसम और भूस्खलन की वजह से लगा था
- सभी वाहन, जिनमें वह ट्रक भी शामिल था, जाम में फंसे थे
- रमज़ान के दौरान ड्राइवर ने इंतजार करते हुए ट्रक की छत पर नमाज़ पढ़ी
- नमाज़ का ट्रैफिक जाम से कोई संबंध नहीं था
यानी चैनल का दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता था।
NBDSA ने क्या कहा?
NBDSA ने अपने आदेश में कहा कि:
- सोशल मीडिया से बिना सत्यापन कंटेंट उठाना गंभीर चूक है
- ब्रॉडकास्ट से पहले तथ्य की पुष्टि अनिवार्य है
- सटीकता (Accuracy) का सिद्धांत तोड़ा गया
अथॉरिटी ने यह भी चेतावनी दी कि आज के दौर में:
- AI जनरेटेड वीडियो
- डीपफेक कंटेंट
- एडिटेड क्लिप्स
आसानी से वायरल हो सकते हैं, इसलिए मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
हालांकि चैनल द्वारा वीडियो हटाने को ध्यान में रखते हुए भारी जुर्माने के बजाय ₹1 लाख का दंड लगाया गया।
जारी किए गए नए दिशा-निर्देश
NBDSA ने सोशल मीडिया कंटेंट के उपयोग को लेकर 6 अहम गाइडलाइंस जारी कीं:
- ग्राउंड रिपोर्टिंग अनिवार्य
- विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि
- स्वतंत्र फैक्ट-चेक
- संदर्भ स्पष्ट करना
- एडिटेड वीडियो की जांच
- प्रसारण से पहले संपादकीय सत्यापन
पहले भी लग चुके हैं जुर्माने
यह पहला मामला नहीं है।
- 2026 में ही एक अन्य मामले में 2 लाख रुपये का जुर्माना
- ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़ी कथित फर्जी रिपोर्ट
- सांप्रदायिक कंटेंट हटाने के कई आदेश
सबसे चर्चित पुराना विवाद 2016 के Jawaharlal Nehru University छात्र आंदोलन से जुड़ा था।
उस समय कथित राष्ट्र-विरोधी नारों का वीडियो प्रसारित किया गया था। बाद में फॉरेंसिक जांच में छेड़छाड़ की पुष्टि हुई। इस मामले में छात्र नेता Kanhaiya Kumar पर राजद्रोह का केस भी दर्ज हुआ था।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह मामला सिर्फ एक चैनल या एक वीडियो का नहीं है।
यह संकेत है कि:
- मीडिया की जवाबदेही तय होगी
- फर्जी खबरों पर निगरानी बढ़ेगी
- सांप्रदायिक एंगल से खबर दिखाना महंगा पड़ सकता है
डिजिटल युग में एक वीडियो मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंचता है। ऐसे में सत्यापन की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।