डाकघर खाता घोटाला
📌 परिचय
डाकघर को देश की सबसे सुरक्षित बचत प्रणाली माना जाता है, लेकिन जब उसी व्यवस्था पर सवाल उठने लगें तो यह आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। छत्तीसगढ़ में सामने आए डाकघर खाता घोटाला मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए भारतीय डाक विभाग को 1.91 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान का आदेश दिया है। यह फैसला न सिर्फ पीड़ित खाताधारकों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की भी मांग करता है।
🏦 क्या है पूरा मामला?
रायपुर स्थित पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय डाकघर से जुड़ा यह मामला अगस्त 2016 से नवंबर 2020 के बीच का है। इस दौरान:
- अनिल कुमार पाण्डेय, उनकी पत्नी और पुत्री ने
- डाक बचत अभिकर्ताओं के माध्यम से
- 19 सावधि जमा (TDR) खाते और
- 2 आवर्ती जमा (RD) खाते खुलवाए
👉 इन खातों की कुल परिपक्वता राशि लगभग 1 करोड़ 97 लाख रुपये थी।
⚠️ कैसे हुआ फर्जी आहरण?
परिवादियों का आरोप है कि:
- खातों की परिपक्वता राशि के पुनर्निवेश हेतु
- पोस्टमास्टर के नाम से चेक और आवश्यक दस्तावेज दिए गए
- इसके बाद उन्हें पासबुक सौंपी गई, जिस पर
- डाकघर की मुहर
- और पोस्टमास्टर के हस्ताक्षर मौजूद थे
लेकिन बाद में पता चला कि:
- एजेंट और डाक विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से
- खाताधारकों की अनुमति के बिना
- खातों से अवैध रूप से राशि निकाल ली गई
📣 शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
परिवादियों ने इस घोटाले की लिखित शिकायत डाक विभाग से की, लेकिन:
- न तो खातों को फ्रीज़ किया गया
- न ही कोई स्पष्ट सूचना दी गई
- और न ही एजेंट के खिलाफ ठोस कार्रवाई हुई
इसी लापरवाही को आधार बनाकर मामला छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग में दायर किया गया।
⚖️ उपभोक्ता आयोग का ऐतिहासिक फैसला
मामले की सुनवाई:
- अध्यक्ष: न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया
- सदस्य: प्रमोद कुमार वर्मा
आयोग ने साफ कहा कि:
“पोस्टमास्टर या विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता के बिना पासबुक जारी होना और खातों से राशि का आहरण संभव नहीं है।”
💰 डाक विभाग को क्या आदेश दिए गए?
उपभोक्ता आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निर्देश दिए:
- ✅ 18 TDR खातों की परिपक्वता राशि का भुगतान
- 💸 कुल राशि: ₹1,91,39,965
- ⏳ भुगतान अवधि: 45 दिन के भीतर
- 📈 ब्याज:
- 20 नवंबर 2023 से
- 6% वार्षिक साधारण ब्याज
- 🧠 मानसिक पीड़ा हेतु मुआवजा: ₹1,00,000
- ⚖️ वाद व्यय: ₹15,000
🔍 क्यों अहम है यह फैसला?
यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- ✔️ सरकारी संस्थानों की जवाबदेही तय करता है
- ✔️ आम नागरिकों के विश्वास को मजबूती देता है
- ✔️ डाक विभाग में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम है
- ✔️ भविष्य में ऐसे घोटालों पर रोक लगाने का संदेश देता है