200 सिपाही, 18 शूटर खत्म करेंगे गांव वालों की दहशत?

उत्तर प्रदेश के बहराइच में आदमखोर भेड़ियों की दहशत ऐसी हो गई है कि लोग रात में सो नहीं पाते. पता नहीं कब और कहां भेड़िया आ जाए कुछ नहीं कहा जा सकता. इन आदमखोरों के हमले में अबतक 9 बच्चों समेत 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हैं. प्रशासन बचे हुए दो भेड़ियों को पकड़ने के लिए लगातार ऑपरेशन चला रहा है. आदमखोरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की 25 टीमें लगी हुई हैं. वहीं लोगों की सुरक्षा को देखते हुए 200 पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है. इसके अलावा पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें रात में पेट्रोलिंग भी कर रही हैं. गांव वालों को सलाह दी जा रही है कि अपने बच्चों को सुरक्षित रखें और रात में घरों के गेट लगाकर अंदर ही सोएं. 

बहराइच जिले की महसी तहसील क्षेत्र के 35 गांवों में भेड़ियों का आतंक है. इन्हीं गांवों में भेड़ियों ने हमले किए हैं, जिनमें बच्चों की मौत हुई और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए. इस इलाके को वन विभाग ने तीन सेक्टर और एक रिजर्व सेक्टर में बांट दिया है. इन सेक्टरों के प्रभारी भी बनाए गए हैं, जिन्हें जिम्मेदारी दी गई है कि भेड़ियों को किस तरह पकड़ा जाए, इसका प्लान बनाएं. इसके अलावा गांवों के लोगों की सुरक्षा को लेकर 200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. इसके अलावा 18 शार्प शूटरों और 62 वनकर्मियों को भी लगाया गया है. अब जैसे ही भेड़िये दिखाई देंगे वैसे ही ये शूटर उन्हें ढेर कर देंगे. 

सेंट्रल जोन की चीफ फॉरेस्ट कंजर्वेटर रेणु सिंह ने बताया, “जहां भेड़िये बच्चों को मार रहे हैं, हम लोगों ने उस एरिया को मैप कर लिया है और तीन सेक्टर में बांटा है. इसके अलावा एक सेक्टर रिजर्व रखा है. इनके इंचार्ज है- डीएफओ और एक एसीएफ है. जो रिजर्व सेक्टर है, उसके इंचार्ज भी एसीएफ हैं. हमने कमान सेंटर बनाया है. जिसमें बाहर से सूचना आएगी. इसको पुलिस कंट्रोल रूप से जोड़ा है ताकि कोई भी घटना के बारे में जानकारी मिले तो तुरंत टीम रवाना की जा सके. थर्मल ड्रोन से भेड़ियों को ट्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं. जैसे ही भेड़िये ट्रेस होंगे, हम उन्हें पकड़ने की कोशिश करेंगे.” 

बहराइच के रामुआपुर में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. रामुआपारु गांव में पहुंची आजतक की टीम ने जब लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि इन्हीं गन्नों के खेत में भेड़िये मांद बनाकर रहते थे. वहां अब पानी भरा हुआ है और भेड़ियों का कोई नामोनिशान तक नहीं है. यहां गर्मी और ठंड के समय भेड़ियों को कोई समस्या नहीं होती, लेकिन बारिश में पानी भर जाने के कारण इनका घर तबाह हो जाता है. ऐसा हर साल होता है.    

गांव वालों का कहना है कि इन मांदों में भेड़ियों के बच्चे थे. कुछ महीने पहले जब सिंचाई के कारण इसमें पानी चला गया था तो बच्चे बाहर निकलकर इधर-उधर भाग गए थे. इसके बाद भी भेड़िये यहां रहने आए और उनके बच्चों को देखा गया. उनका कहना है कि भेड़ियों का घर घाघर नदी में आई बाढ़ से तबाह हो गया है. इस कारण पूरा कुनबा यहां से भागने को मजबूर हो गया.  

वन विभाग की ओर से भी यही तर्क दिया गया कि इस कारण से ही भेड़ियों का गुस्सा भड़का और वे आदमखोर हो गए. बहराइच में ‘ऑपरेशन भेड़िया’ को लीड कर रहे यूपी वन निगम के महाप्रबंधक संजय पाठक ने बताया कि कोई जानवर अपने आप आदमखोर नहीं बन जाता या ऐसे ही किसी को नहीं मारता. उन्होंने बताया कि दो चीज हैं पहला हैबिटेट का नुकसान, जो सबसे बड़ा फैक्टर है. उनके क्षेत्र डूब क्षेत्र में रहे हैं. उनमें अगर पानी भर जाए ऐसी दशा में उन्हें वापस जाना पड़ता है. ऐसे में जानवर की कोई नीयत नहीं होती, लेकिन चांस एनकाउंटर हो जाता है और अगर उन्हें खून लग गया कि आसान शिकार है तो फिर अगली बार भी चांस ले लेते हैं. 

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