नक्सलियों का सरेंडर
बीजापुर में 25 नक्सलियों का सरेंडर, एक बड़ा नक्सल विरोधी कदम
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को, करीब 25 नक्सलियों ने अपने हथियार डालकर सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर किया। इस सरेंडर में 12 महिलाएं भी शामिल थीं। सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर करने वाले इन माओवादियों से 7 किलो सोना, 2.92 करोड़ रुपये नकद और 93 हथियार बरामद किए गए हैं। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे मिशन 2026 की एक अहम कड़ी साबित हो रही है।
अहम जानकारी:
- कुल नक्सली सरेंडर: 25
- महिलाओं की संख्या: 12
- बरामद किए गए सामान:
- 7 किलो सोना
- 2.92 करोड़ रुपये नकद
- 93 हथियार
पी. सुंदरराज का बयान
बस्तर क्षेत्र के आईजी पी. सुंदरराज ने इस मामले की जानकारी दी और इसे नक्सल विरोधी अभियान की एक बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा,
“आज हम एक ऐतिहासिक क्षण के गवाह हैं। बस्तर संभाग में नक्सल गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं। हमने अपना लक्ष्य लगभग हासिल कर लिया है। बाकी बचे नक्सलियों के लिए समय कम होता जा रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह घटना नक्सलवाद विरोधी अभियान का एक अहम पड़ाव है और आने वाले दिनों में बाकी बचे नक्सली भी मुख्यधारा में शामिल हो सकते हैं।
मिशन 2026: नक्सलवाद मुक्त बस्तर
यह सरेंडर मिशन 2026 का एक अहम हिस्सा है, जिसके तहत सुरक्षाबल बस्तर संभाग को पूरी तरह से नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखते हैं। सुंदरराज ने यह भी बताया कि इसके साथ ही सुकमा जिले को भी नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त घोषित किया गया है।
सुकमा में भी बड़ी सफलता:
सुकमा जिले में भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबर आई। दो महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जो नक्सल संगठन की “कंपनी नंबर 8” की सदस्य थीं। इन दोनों महिलाओं पर कुल मिलाकर 16 लाख रुपये का इनाम घोषित था। एसपी किरण जी चव्हाण ने यह घोषणा की कि आत्मसमर्पण करने के बाद इनका पुनर्वास किया गया है।
क्या यह नक्सलवाद के खिलाफ अंत की शुरुआत है?
यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ भारत सरकार की कड़ी कार्रवाई का प्रतीक बन रही है। बस्तर और सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस और सुरक्षाबलों की सख्त रणनीति और स्थानीय लोगों का समर्थन इस अभियान को सफल बना रहे हैं। अब तक हुए सरेंडर और आत्मसमर्पण से यह संकेत मिलता है कि नक्सली संगठन अब कमजोर हो चुके हैं, और जल्दी ही बाकी बचे माओवादी भी मुख्यधारा में लौट सकते हैं।