पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर तोड़फोड़ की कथित साजिश के सिलसिले में कोलकाता पुलिस ने गुरुवार को पांच लोगों को गिरफ्तार किया. यह साजिश कथित तौर पर ‘वी वांट जस्टिस’ नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में रची गई थी, जिसमें एक वॉयस क्लिप शेयर की गई थी. इस क्लिप में ग्रुप मेंबर्स को साउथ कोलकाता के एक इलाके कालीघाट में इकट्ठा होने और इस कृत्य को अंजाम देने के लिए उकसाया गया था.
ऑडियो क्लिप के क्रिएटर शुभम सेन शर्मा को गिरफ्तार जा चुका है. क्लिप में मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित घर पर तोड़फोड़ करने और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने की धमकी दी गई थी.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी शर्मा ने ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर कहा, “नबन्ना (सचिवालय) जाने की जरूरत नहीं है, एक काम करो, चलो सब मिलकर कालीघाट चलते हैं और तोड़फोड़ करते हैं. इसके बाद, ममता बनर्जी अपने आप ही अलग हो जाएंगी. वह खुद ही इस्तीफा दे देंगी, उनके मन में डर है.”
आरोपी ने कथित तौर पर कहा, “पुलिस कालीघाट की सुरक्षा कब तक करेगी? एक घंटा? दो घंटे? कितने पुलिसकर्मी आएंगे? मुश्किल से 20-30? हमारे पास और भी बहुत से लोग हैं. टेंशन नहीं लीजिए, कालीघाट आइए, हम भी जा रहे हैं.”
साजिश में कथित संलिप्तता के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने वाले शख्स और एडमिन सहित चार अन्य को हिरासत में लिया गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के बाद यह कार्रवाई की गई. कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को राजधानी में ‘नबन्ना अभियान’ रैली में भड़की हिंसा के सिलसिले में नवगठित छात्र संगठन पश्चिम बंग छात्र समाज के नेता प्रबीर को भी गिरफ्तार किया है.
यह गिरफ्तारी छात्रों द्वारा सचिवालय तक मार्च निकालने और हाल ही में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर से रेप और हत्या के मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग करने के लिए आयोजित बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद हुई. विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. इस दौरान कई लोग घायल हुए और गिरफ्तारियां हुईं.
कई घंटों तक चले प्रोटेस्ट के दौरान 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने बताया कि झड़पों में उनके 15 और राज्य पुलिस बल के 14 जवान घायल हुए हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मैंने कुछ प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार देखा है, जिसे कल हमारे छात्रों के कार्यक्रम में मेरे द्वारा दिए गए भाषण के संदर्भ में चलाया गया है. मैं यह साफ करना चाहती हूं कि मैंने (मेडिकल आदि) छात्रों या उनके आंदोलन के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा है. मैं उनके आंदोलन का पूर्ण समर्थन करती हूं, उनका आंदोलन जायज है. मैंने उन्हें कभी धमकी नहीं दी, जैसा कि कुछ लोग मुझ पर आरोप लगा रहे हैं. यह आरोप पूरी तरह से झूठा है.”
उन्होंने आगे कहा कि मैंने बीजेपी के खिलाफ बोला है, मैंने उनके खिलाफ इसलिए बोला है, क्योंकि भारत सरकार के समर्थन से वे हमारे राज्य में लोकतंत्र को खतरे में डाल रहे हैं और अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. केंद्र के समर्थन से वे अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और मैंने उनके खिलाफ आवाज उठाई है.
ममता ने आगे कहा, “मैं यह भी साफ करना चाहती हूं कि कल मैंने अपनी स्पीच में जिस वाक्यांश (“फोंश करा”) का इस्तेमाल किया था, वह श्री रामकृष्ण परमहंस देव का एक उद्धरण है. महान संत ने कहा था कि कभी-कभी अपनी आवाज उठाने की जरूरत होती है. जब अपराध और आपराधिक वारदातें होती हैं, तो विरोध की आवाज उठानी पड़ती है. उस मुद्दे पर मेरा भाषण महान रामकृष्णवादी कहावत का प्रत्यक्ष संकेत था.”