दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में दिल्ली दंगे के मामले में पांच लोगों को गैर इरादतन हत्या और गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने के आरोप में दोषी ठहराया है। भीड़ ने एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी थी। अदालत ने इस मामले में दो लोगों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
दिल्ली की एक अदालत में दिल्ली दंगे से जुड़े दयालपुर थाने द्वारा सात आरोपियों के खिलाफ दर्ज एक मामले की सुनवाई हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला की अदालत में दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे पेश हुए।
पिछले शनिवार को दिए गए अपने 63 पन्नों के फैसले में अदालत ने उसके सामने मौजूद सबूतों के आधार पर कहा कि यह स्थापित हो गया है कि घातक हथियारों से लैस एक दंगाई भीड़ ने 25 फरवरी 2020 को चांद बाग इलाके में पीर बाबा मजार के पास मोहसिन की हत्या कर दी थी।
कोर्ट ने पूछा कि क्या आरोपी व्यक्ति दंगाइयों में से थे, जिन्होंने पीड़ित मोहसिन पर बेरहमी से हमला किया जिससे उसकी मौत हो गई? अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के चार गवाहों की गवाही में कोई संदेह नहीं है कि पांच आरोपी- अरुण, अमन कश्यप, आशीष, प्रदीप राय और देवेंद्र कुमार उस दंगाई भीड़ का हिस्सा थे जिसने पीड़ित पर हमला किया था। लेकिन यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं था कि इन पांच आरोपियों ने मोहसिन पर हमला किया था। इसमें कहा गया है कि मोहसिन की मौत के लिए उनका आपराधिक दायित्व आईपीसी की धारा 149 (गैरकानूनी सभा) पर आधारित होना चाहिए।
न्यायाधीश ने कहा, “पीड़ित के सिर पर चोट पहुंचाने के लिए इन पांच आरोपियों में से किसी की विशेष भूमिका के अभाव में, मुझे लगता है कि उनका दायित्व गैर इरादतन हत्या तक सीमित होना चाहिए।”
दो अन्य आरोपियों को न्यायाधीश ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। कहा कि यह साबित नहीं हुआ है कि कृष्णकांत और राहुल भारद्वाज दंगाई भीड़ का हिस्सा थे। न ही यह स्थापित हुआ कि पीड़ित का मोबाइल फोन उनके पास से बरामद हुआ था।
न्यायाधीश ने कहा, “मुझे लगता है कि (पांच) आरोपी व्यक्ति आईपीसी की धारा 148 (दंगा करना, घातक हथियार से लैस होना) और धारा 149 (हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर इरादतन हत्या) के तहत दंडनीय अपराध के दोषी हैं। उन्हें दोषी ठहराया जाता है।” मामले की अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी।