दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ – केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नक्सल खात्मे की समय सीमा के अंतिम दिन दंतेवाड़ा जिले में पांच नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। यह घटना बस्तर आईजी सुंदरराज पी., डीआईजी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल राकेश, और कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव की मौजूदगी में हुई। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में प्रमुख रूप से भैरमगढ़ एरिया कमेटी के सदस्य सोमें कड़ती शामिल हैं, जिन पर राज्य शासन द्वारा ₹5 लाख का पुरस्कार घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख नक्सली:
- सोमें कड़ती – भैरमगढ़ एरिया कमेटी का सदस्य, बीजापुर जिले के मिरतुर थाना के चेरली गांव का निवासी। इस पर ₹5 लाख का इनाम था।
- लखमा पोयाम – भैरमगढ़ एरिया कमेटी का सदस्य, बीजापुर जिले के मिरतुर थाना के बेचापाल का निवासी, जिस पर ₹1 लाख का इनाम था।
- सरिता पोडियाम – भैरमगढ़ एरिया कमेटी की सदस्य, बीजापुर जिले के जांगला थाना के हिंगुम गांव की निवासी।
- जोगी कलमू – बीजापुर जिले के बासागुड़ा थाना के नेंड्रा का निवासी।
- मोटी ओयाम – गंगालूर एरिया कमेटी का सदस्य, बीजापुर जिले के गंगालूर थाना के पीडिया गांव का निवासी।
इन नक्सलियों पर प्रत्येक पर ₹1 लाख का इनाम घोषित था।
सरेंडर का महत्त्व:
यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह नक्सल विरोधी अभियान के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न केवल नक्सली गतिविधियों में कमी आएगी बल्कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्य धारा में लाकर उन्हें सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की दिशा में मदद मिल सकेगी।
आत्मसमर्पण की प्रक्रिया:
आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों ने मुख्यधारा की जीवन शैली को अपनाने का निर्णय लिया और सुरक्षा बलों के सामने अपनी बंदूकें डाल दीं। इस प्रक्रिया में इन नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष अपनी पहचान बताई और सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ लेने का आह्वान किया।
यह घटनाक्रम न केवल पुलिस बल के लिए, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है, क्योंकि इससे इलाके में शांति की उम्मीदें बढ़ी हैं।
आगे की योजना:
अब प्रशासन का मुख्य लक्ष्य इन नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत उन्हें समाज में सामान्य जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करना होगा। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की आध्यात्मिक और मानसिक पुनर्निर्माण के लिए भी विशेष कार्यक्रम तैयार किए जा सकते हैं।
नक्सलवाद के खिलाफ यह अभियान न केवल राज्य सरकार बल्कि केंद्र सरकार के साथ मिलकर कड़े कदम उठाए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, ताकि क्षेत्र में नक्सली प्रभाव कम से कम हो सके।