भारत-पाक मैच बॉयकॉट
📰 आर्टिकल (400+ शब्द)
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट हमेशा से सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं और राजनीति से जुड़ा विषय रहा है। एक बार फिर यही देखने को मिला जब पाकिस्तान सरकार ने भारत के खिलाफ 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप मुकाबले का बहिष्कार करने का फैसला किया। इस फैसले ने न सिर्फ क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी, बल्कि भारतीय राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
📌 पाकिस्तान ने क्यों लिया बॉयकॉट का फैसला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने यह कदम बांग्लादेश के समर्थन में एकजुटता दिखाने के लिए उठाया है।
- 20 टीमों के टी-20 वर्ल्ड कप से बांग्लादेश को बाहर किया गया
- इसके बाद पाकिस्तान लगातार टूर्नामेंट से हटने की धमकी देता रहा
- ICC ने नियमों का हवाला देकर पाकिस्तान पर सख्ती दिखाई
- अंततः पाकिस्तान टूर्नामेंट खेलने को राज़ी हुआ, लेकिन भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार कर लिया
🏏 BCCI की चुप्पी पर सवाल
भारत-पाक मैच बॉयकॉट पर अभी तक BCCI की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, कांग्रेस सांसद और BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने साफ किया कि ICC से चर्चा किए बिना कोई प्रतिक्रिया देना उचित नहीं होगा।
यह चुप्पी अब सवालों के घेरे में है—क्या दुनिया के सबसे ताकतवर क्रिकेट बोर्ड होने के बावजूद BCCI दबाव में है?
🗣️ विपक्षी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने सरकार और क्रिकेट प्रशासन दोनों को घेरा।
👉 शशि थरूर (कांग्रेस)
- पाकिस्तान के फैसले को “शर्मनाक” बताया
- कहा कि क्रिकेट को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए
- बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्ताफिज़ुर रहमान के IPL कॉन्ट्रैक्ट का मुद्दा उठाया
- ICC से आपात बातचीत की मांग की
उनका कहना था कि खेल लोगों को जोड़ने का माध्यम है, न कि राजनीतिक हथियार।
👉 प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना उद्धव गुट)
प्रियंका चतुर्वेदी ने तो सीधे-सीधे इसे “BCCI के मुंह पर तमाचा” करार दे दिया।
उन्होंने कहा:
- पाकिस्तान पहले ही एशिया कप ट्रॉफी नहीं सौंप चुका है
- अब भारत के खिलाफ मैच का बॉयकॉट कर रहा है
- जुर्माना भरने को तैयार है, लेकिन मैच नहीं खेलेगा
- यह भारतीय खेल मंत्री और BCCI की कूटनीतिक विफलता है
🌍 ICC की भूमिका क्यों अहम?
इस पूरे विवाद में अब सबकी नजर ICC पर टिकी है।
क्या ICC सख्त कार्रवाई करेगा या यह मामला भी सिर्फ जुर्माने तक सीमित रह जाएगा?