असम घुसपैठिए
भूमिका
असम में घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि कांग्रेस के लगभग 20 वर्षों के शासन में असम की पूरी जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) बदल गई। उनके अनुसार, राज्य के सिर्फ सात जिलों में करीब 64 लाख घुसपैठिए बस गए, जिससे स्थानीय आबादी और संस्कृति पर गहरा असर पड़ा।
अमित शाह का बड़ा आरोप
अमित शाह ने यह बयान करने चापोरी में आयोजित 10वें ‘मिसिंग युवा महोत्सव’ के समापन समारोह में दिया। उन्होंने कहा कि:
- कांग्रेस शासन के दौरान
- घुसपैठियों की संख्या शून्य से बढ़कर 64 लाख तक पहुंच गई
- असम के सात जिलों में घुसपैठिए बहुसंख्यक हो गए
- इसका सीधा असर
- स्थानीय समुदायों की पहचान
- सामाजिक संतुलन
- और संसाधनों पर पड़ा
उनके शब्दों में, यह केवल जनसंख्या का मुद्दा नहीं, बल्कि असम की पहचान का सवाल है।
भाजपा सरकार का दावा: हालात बदल रहे हैं
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और असम की भाजपा सरकार इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि:
- भाजपा सरकार ने अब तक
- 1.26 लाख एकड़ अतिक्रमित भूमि को घुसपैठियों से मुक्त कराया
- अवैध प्रवास के खिलाफ
- सख्त प्रशासनिक कार्रवाई
- और कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं
उन्होंने जनता से अपील की कि यदि वे असम को घुसपैठ से पूरी तरह मुक्त देखना चाहते हैं, तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को फिर से सत्ता में लाएं।
मिसिंग समुदाय की भूमिका पर विशेष ज़िक्र
अमित शाह ने मिसिंग समुदाय की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि:
- मिसिंग समुदाय की
- मेहनती जीवनशैली
- जमीन से जुड़ी संस्कृति
- के कारण
- ऊपरी असम के कई इलाकों में घुसपैठियों को बसने का मौका नहीं मिला
उन्होंने स्पष्ट किया कि घुसपैठ रोकने के लिए हथियार नहीं, बल्कि संस्कृति और परिश्रम सबसे बड़ा हथियार है।
कांग्रेस पर आदिवासी पहचान मिटाने का आरोप
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि उसके शासनकाल में:
- कई आदिवासी समुदायों को
- अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा
- उनकी समस्याओं को
- नज़रअंदाज़ किया गया
उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार केंद्र द्वारा नियुक्त वार्ताकारों के माध्यम से मिसिंग सहित सभी आदिवासी समुदायों की समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्यों अहम है असम घुसपैठ का मुद्दा?
असम में घुसपैठ का सवाल केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े हैं:
- 🌍 जनसांख्यिकीय संतुलन
- 🧑🤝🧑 स्थानीय समुदायों की सुरक्षा
- 🌾 भूमि और संसाधनों का संरक्षण
- 🆔 संस्कृति और पहचान का भविष्य