बस्तर की तस्वीर बदलेगी पारापुर डायवर्सन योजना: 9.30 करोड़ की मंजूरी से 350 हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी

पारापुर डायवर्सन योजना


छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए एक बड़ी और राहतभरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने किसानों और ग्रामीण विकास को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए पारापुर डायवर्सन योजना के लिए 9 करोड़ 30 लाख 11 हजार रुपये की वित्तीय मंजूरी प्रदान की है। यह योजना बस्तर जिले के लोहांडीगुड़ा विकासखण्ड में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करेगी और सैकड़ों किसानों की खेती को नई दिशा देगी।


क्या है पारापुर डायवर्सन योजना?

पारापुर डायवर्सन योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना है। इस योजना के तहत:

  • 350 हेक्टेयर रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी
  • किसानों को वर्षा पर निर्भरता से राहत मिलेगी
  • फसल उत्पादन और आय में बढ़ोतरी होगी

यह परियोजना बस्तर जैसे आदिवासी और कृषि प्रधान क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


वित्तीय मंजूरी से क्या बदलेगा?

राज्य शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा दी गई इस वित्तीय स्वीकृति से परियोजना के कार्यों में तेजी आएगी। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • 9.30 करोड़ रुपये की कुल राशि स्वीकृत
  • परियोजना के लिए पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति जारी
  • कार्यों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, जगदलपुर को सौंपी गई

इससे योजना को तकनीकी और प्रशासनिक मजबूती मिलेगी।


किसानों को क्या होगा सीधा लाभ?

पारापुर डायवर्सन योजना का सीधा असर स्थानीय किसानों की जीवनशैली और आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

प्रमुख लाभ:

  • समय पर सिंचाई से फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी
  • खरीफ और रबी दोनों मौसमों में खेती संभव
  • बहुफसली खेती को मिलेगा बढ़ावा
  • खेती से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

इसके अलावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।


बस्तर के विकास में एक और कदम

बस्तर क्षेत्र लंबे समय से विकास परियोजनाओं की प्रतीक्षा में रहा है। यह योजना न केवल कृषि बल्कि समग्र ग्रामीण विकास की दिशा में एक मजबूत पहल है।

  • जल प्रबंधन में सुधार
  • ग्रामीण पलायन में कमी
  • स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग

सरकार की यह पहल यह दर्शाती है कि बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

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