यूपी के कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हालांकि 11 महीने बाद बेटा जेल से छूटकर बाहर आया। पिता का कहना है कि देर से ही सही लेकिन कोर्ट से न्याय तो मिला। वहीं, क्षेत्र में ये मामला सुर्खियो में है।
कानपुर में 11 महीने तक जेल में बंद गोविंद निषाद को छुड़ाने को पनकी की मायापुरम बस्ती साइट नंबर दो के रहने वाले माता-पिता ने गोंडा में पुश्तैनी घर और खेत तक बेच दिया। एलएमएल फैक्ट्री के पास पनकी चौकी के बगल में पूड़ी-छोले का ठेला लगाने वाले बबलू निषाद और मीना ने बताया अब उन्हें किसी से शिकायत नहीं है। बेटा आ गया, देर से सही पर न्याय मिला। केस इसलिए लड़ा कि वे जानते थे कि बेटे को फंसाया गया है। कोर्ट में पीड़िता और उसकी नानी की गवाही से यह साबित हो गया। मीना ने कहा इसे शिकायत न समझें, एक अपील है किसी बेगुनाह पर झूठी एफआईआर करा देने पर जेल जाने से पहले जांच जरूर हो, नहीं तो पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है।
गोविंद ने बताया सात साल पहले बहन ने मोहल्ले के एक युवक से लव मैरिज की थी। पिता ने रिपोर्ट लिखाई तो जीजा जेल चले गए। हालांकि सुलह के बाद वह लौट तो आए लेकिन जीजा की नानी और बहन ने मुझे ही फंसा दिया। कोर्ट में मेडिकल रिपोर्ट में कुछ नहीं निकला। मुकदमा दर्ज कराने वालों ने भी यह माना कि झूठा केस दर्ज कराया था। लेकिन जीजा एक दूसरे मुकदमें में जेल में बंद हैं। बहन और छह साल की भांजी अलग रह रहे हैं। गोविंद ने बताया वह पहले रिश्तेदार के साथ लोडर चलाते थे। 22 साल की उम्र में 11 महीने जेल में रहे और जेल से बेगुनाह लौटने के बाद समाज वैसी नजरों से नहीं देखता, जेल जाने से पहले देखता था।