भोपाल पानी संकट
भोपाल पानी संकट: नगर निगम की घातक गलती, खतरनाक निर्माण से बढ़ा जोखिम
भोपाल के गैस पीड़ित इलाके में एक ऐसी स्थिति सामने आई है, जिसने जन स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंदौर के भागीरथपुरा में हुए जल त्रासदी से 35 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन भोपाल नगर निगम ने इससे कोई सबक नहीं लिया।
हाल ही में यह पता चला कि पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन के ऊपर शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। यदि पाइपलाइन में किसी कारणवश लीकेज होता है, तो शौचालय का गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल सकता है। यह स्थिति इलाके में रहने वाले नागरिकों के लिए गंभीर सुरक्षा और स्वास्थ्य खतरा बन सकती है।
इस निर्माण के खतरे
- सीधा जल प्रदूषण: पाइपलाइन में रिसाव होने पर शौचालय का पानी पीने के पानी में जा सकता है।
- मरम्मत मुश्किल: पाइपलाइन को ठीक करना कठिन होगा, खासकर शौचालय के ऊपर होने के कारण।
- भागीरथपुरा जैसी त्रासदी का खतरा: पहले ही जल त्रासदी में 35 लोगों की मौत हुई थी।
- जनस्वास्थ्य संकट: पानी के माध्यम से फैलने वाली बीमारियां जैसे हैजा, टाइफाइड और पेट संबंधी संक्रमण का खतरा।
निगम की प्रतिक्रिया
नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा:
- लोकल इंजीनियर ने तकनीकी विश्लेषण किया होगा।
- मामले का संज्ञान लिया गया है।
- अधिकारियों के साथ चर्चा कर उचित कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, इस जवाब से नागरिकों को संतोष नहीं हुआ है। नगर निगम की यह लापरवाही किसी बड़े हादसे की भूमि तैयार कर सकती है।
क्या होना चाहिए था?
- पानी की पाइपलाइन के ऊपर कोई भी निर्माण नहीं होना चाहिए।
- यदि निर्माण आवश्यक हो, तो सुरक्षा मानक और तकनीकी उपाय अपनाने चाहिए।
- नियमित निरीक्षण और पाइपलाइन की समय-समय पर जांच आवश्यक है।
- जनता और स्थानीय प्रशासन को जल सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता दी जानी चाहिए।