कौड़ी जैसी सड़क, करोड़ों की मरम्मत! एक साल में उखड़ी PWD रोड ने खोली सिस्टम की पोल

PWD सड़क घोटाला


PWD सड़क घोटाला: रायपुर में विकास की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सामने आई एक तस्वीर ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। PWD सड़क घोटाला उस वक्त चर्चा में आया, जब महज एक साल पहले बनी करोड़ों रुपये की सड़क उखड़ती नजर आई। डामर की परत चादर की तरह खिसक रही है और सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान खतरे में पड़ गई है।

यह मामला कौशल्या विहार (पूर्व में कमल विहार) गेट के सामने, डुमरतराई सब्जी बाजार से होते हुए फुंडहर जाने वाली सड़क का है, जो शहर के व्यस्त इलाकों में गिनी जाती है।


कब और कितनी लागत से बनी थी सड़क?

प्राप्त जानकारी के अनुसार:

  • सड़क का निर्माण फरवरी 2025 में हुआ
  • लागत: 2 करोड़ रुपये से अधिक
  • निर्माण एजेंसी: लोक निर्माण विभाग (PWD)
  • उद्देश्य: यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाना

लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद सड़क की हालत देखकर स्थानीय लोग हैरान हैं।


सड़क की मौजूदा हालत क्या है?

वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है:

  • डामर की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ रही है
  • जगह-जगह चौड़े और गहरे गड्ढे
  • बारिश और ट्रैफिक से हालात और बिगड़े
  • दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए हादसे का खतरा

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रात के समय इस सड़क से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं।


सवालों के घेरे में PWD की कार्यशैली

PWD सड़क घोटाला की चर्चा इसलिए भी तेज हो गई क्योंकि:

  • सड़क की उम्र अभी एक साल भी नहीं हुई
  • निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता संदिग्ध
  • समय से पहले मरम्मत पर फिर से सरकारी पैसा खर्च
  • जवाबदेही तय करने की कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं

लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।


आनन-फानन में शुरू हुई मरम्मत

जैसे ही मामला सामने आया:

  • PWD अधिकारी मौके पर पहुंचे
  • सड़क को तुरंत खोदा गया
  • कुछ ही घंटों में फिर से डामरीकरण शुरू
  • बिना लंबी जांच के तात्कालिक सुधार

इस जल्दबाजी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह सिर्फ “दिखावटी मरम्मत” है?


PWD अधिकारी का बयान

PWD अधिकारी आशीष नागपुरे ने सफाई देते हुए कहा:

  • सड़क को फिर से बनाया जा रहा है
  • रफनेस खत्म करने के लिए सुधार जरूरी था
  • अगर सड़क को ऐसे ही छोड़ दिया जाता, तो एक्सीडेंट की संभावना थी
  • जहां-जहां दिक्कत है, वहां नया डामर डालकर रोड को प्लेन किया जा रहा है

हालांकि, उनके बयान से यह साफ नहीं हो पाया कि शुरुआती निर्माण में चूक कहां हुई।


जनता के मन में उठते सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है:

  • क्या करोड़ों रुपये सिर्फ “पैचवर्क” के लिए खर्च हो रहे हैं?
  • क्या घटिया निर्माण सामग्री की जांच होगी?
  • दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

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