हरियाणा में हाई वोल्टेज प्रचार अभियान चलाने और अरविंद केजरीवाल को ‘हरियाणा की मिट्टी का बेटा’ के रूप में पेश करने के बावजूद, आम आदमी पार्टी को इस हिंदी भाषी राज्य में भारी निराशा हाथ लगी है. हरियाणा चुनाव नतीजों के अब तक के रुझान में AAP का खाता भी खुलता हुआ नहीं दिख रहा है. उसके लगभग सभी उम्मीदवार चौथे नंबर या उससे भी पीछे चल रहे हैं और इस बात की पूरी संभावना है कि अपनी जमानत भी न बचा पाएं.
आम आदमी पार्टी जो पड़ोसी राज्यों दिल्ली और पंजाब में सत्ता में है, वह हरियाणा में भी अपने पैर जमाने की उम्मीद कर रही थी. AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल हरियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान दावा करते फिर रहे थे कि बिना उनकी पार्टी के सहयोग के राज्य में कोई दल सरकार बनाने में सफल नहीं होगा. लेकिन चुनाव आयोग के आंकड़ों कुछ और कहानी बयां करते हैं. आम आदमी पार्टी को हरियाणा में सिर्फ 1.65% वोट ही मिलता हुआ दिख रहा है.
कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर बात नहीं बनने के बाद AAP ने हरियाणा की 90 में से 89 सीटों पर चुनाव लड़ा था. साल 2019 के हरियाणा चुनाव में भी AAP ने 46 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सभी जगह उसे हार का सामना करना पड़ा था. आम आदमी पार्टी को तक NOTA से भी कम वोट शेयर प्राप्त हुआ था. साल 2014 में अपनी चुनावी शुरुआत के बाद से, AAP हरियाणा में किसी भी विधानसभा चुनाव या लोकसभा चुनाव में अपना खाता खोलने में विफल रही है.
अरविंद केजरीवाल पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री पर इंडिया ब्लॉक के साथ ‘विश्वासघात’ करने और कांग्रेस के वोट काटने का आरोप लगाया. उनकी यह टिप्पणी तब आई जब चुनाव परिणाम के शुरुआत रुझानों में बैकफुट पर रहने के बाद भाजपा ने जबरदस्त वापसी की और राज्य में लगातार तीसरी जीत हासिल करने की राह पर आगे बढ़ी.
‘सिर्फ कांग्रेस से बदला लेने के लिए हरियाणा में उतरे. मुझपे BJP एजेंट होने के झूठे आरोप लगाए, खुद आज INDIA अलायंस से गद्दारी करके INC की वोट काट रहे हैं! सब छोड़ो, विनेश फोगाट तक को हराने के लिए प्रत्याशी उतारा. क्यों ऐसा हाल आ गया है कि अपने गृह राज्य में जमानतें नहीं बचा पा रहे? अब भी वक्त है, अहंकार छोड़ो, धुंधली आंखों से पर्दा हटाओ, ड्रामा मत करो और जनता के लिए काम करो’
दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने और तिहाड़ जेल से उनके रिहा होने के बाद हरियाणा में AAP के चुनाव अभियान को बड़ी मजबूती मिली थी. उन्होंने पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया और अपने भाषणों में दावा किया था कि हरियाणा में अगली सरकार पार्टी के समर्थन के बिना नहीं बनेगी. हालांकि, नतीजों से पता चलता है कि AAP अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रही और अरविंद केजरीवाल के प्रचार करने से भी कोई फर्क नहीं पड़ा और आम आदमी पार्टी राज्य में अपना खाता भी नहीं खोल सकेगी.