अडानी परमाणु ऊर्जा
गौतम अडानी समूह ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड (AAEL) की स्थापना की है। यह कंपनी एटॉमिक और न्यूक्लियर एनर्जी से बिजली के उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण का काम करेगी।
📌 कंपनी गठन की खास बातें
- कंपनी का नाम: अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड
- स्थापना की तारीख: 11 फरवरी 2026
- अधिकृत पूंजी: 5,00,000 रुपये
- शेयर: 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 50,000 शेयर
- स्वामित्व: अडानी पावर की 100% हिस्सेदारी
- प्रमाणपत्र: केंद्रीय रजिस्ट्रेशन केंद्र से प्रमाणपत्र प्राप्त
अडानी पावर के अनुसार, यह पूरी तरह से समूह की सब्सिडियरी कंपनी है, जो भारत में न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करेगी।
🏛️ शांति बिल के बाद आया यह कदम
अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड का गठन शांति बिल, 2025 के तुरंत बाद हुआ है। यह बिल सरकार ने पारित किया है और इसके तहत:
- ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी निवेश की सुविधा बढ़ाई गई।
- न्यूक्लियर एनर्जी से बिजली उत्पादन के लिए नए अवसर खुले।
- समूह ने इस कानून को देखते हुए अपने प्लान को जमीन पर उतारा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी समूह इस कदम के जरिए भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है।
📊 अडानी पावर के तिमाही नतीजे
हाल ही में अडानी पावर ने तिमाही नतीजे जारी किए, जिनमें दिखा:
- नेट प्रॉफिट: 2,488 करोड़ रुपये (पिछली अवधि 2,940 करोड़) → 15% की गिरावट
- कुल राजस्व: 12,717 करोड़ रुपये (पिछले वर्ष 13,434 करोड़)
- बिजली बिक्री: 23.6 अरब यूनिट (पिछले वर्ष 23.3 अरब यूनिट)
कंपनी ने कहा कि मुनाफे में कमी का कारण पिछली अवधि की एकमुश्त आय में कमी और मानसून की असामान्य स्थिति रही।
📉 शेयर की स्थिति
- गुरुवार को अडानी पावर का शेयर 148.90 रुपये तक गिरा।
- 52 हफ्ते का हाई-लो रेंज: 182.75 रुपये से 98 रुपये।
- विशेषज्ञों का मानना है कि नए न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट की खबर से लंबे समय में शेयर में स्थिर वृद्धि की संभावना है।
⚡ अडानी का भविष्य और न्यूक्लियर प्लान
- न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए तैयारी
- भारत में स्वच्छ और स्थायी बिजली उत्पादन को बढ़ावा
- केंद्र सरकार की नई नीतियों के तहत निजी निवेश के अवसरों का लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड का गठन भारत के ऊर्जा परिदृश्य में नया ऐतिहासिक कदम माना जा सकता है। यह कदम केवल समूह के लिए नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण है।