यह कोई पहली बार नहीं है जब चीन ने ऐसी महामारी का सामना किया है। चीन, जो दुनिया का दूसरा सबसे घनी आबादी वाला देश है, महामारी के प्रकोप का केंद्र बन चुका है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर चीन से ही अधिकतर महामारी की शुरुआत क्यों होती है।ऐसा क्यों होता है, जबकि चीन विश्व की आर्थिक महाशक्ति बनने की अग्रसर है। उसकी टेक्नोलॉजी विश्व की सबसे उन्नत टेक्नोलॉजी मानी जाती है। फिर वहां बार-बार महामारी का प्रकोप क्यों होता है?
चीन में क्यों फैलता रहता है वायरस
चीन में महामारी के केंद्र बनने के पीछे कई भौतिक और सांस्कृतिक कारण हैं, जिनमें घनी आबादी, जंगली जानवरों का सेवन, और अत्यधिक शहरीकरण जैसे पहलू शामिल हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि पूरी दुनिया में मांस का कारोबार बढ़ रहा है। जंगल कम हो रहे हैं और जानवरों की फार्मिंग बढ़ रही है। इसकी वजह से जंगली जानवरों के वायरस फार्मिंग वाले जानवरों में आ जाते हैं. वहां से ये वायरस आदमी के शरीर में पहुंच जाते हैं।
1. जंगली जानवरों के साथ संपर्क: चीन में लोग अक्सर जंगली जानवरों को खाया जाता है. यह जानवर कई तरह के वायरसों के वाहक होते हैं, जो इंसानों में फैल सकते हैं। जैसे कोरोना वायरस की उत्पत्ति जो शेर और चमगादड़ जैसे जानवरों से जुड़ी थी।
2. वेट मार्केट्स: चीन के वेट मार्केट्स में अलग अलग तरह के जंगली जानवरों की बिक्री होती है, जहां संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता है। मीट मार्केट में जानवरों के मांस और ब्लड का ह्यूमन बॉडी से संपर्क होता रहता है. ये वायरस के फैलने की सबसे बड़ी वजह है।
चीन से विश्व में फैली महत्वपूर्ण खतरनाक महामारी
कोविड-19 (कोरोना वायरस) (COVID-19)
COVID-19 SARS-CoV-2 के कारण होने वाली बीमारी ह, जो 2019 के अंत में चीन में फैली थी। इसके बाद इसने तेज़ी से पूरे विश्व को गिरफ्त में ले लिया। इसे 11 मार्च 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वैश्विक महामारी घोषित किया गया था। इस महामारी से पूरे विश्व में हुई मौतों का कोई आधिकारिक डाटा सामने नीं आया है। हालांकि ऐसी संभावना व्यक्त की जाती है कि इस महामारी से पूरे विश्व में 15 लाख से अधिक मौतें हुई है। भारत में ही 5 लाख से अधिक लोगों की मौत कोरोना के कारण हुई थी। WHO ने इस महामारी को मई 2023 में अंतरराष्ट्रीय चिंता की श्रेणी से हटा दिया था। हालांकि यह वायरस अब भी लोगों के लिए गंभीर जोखिम बना हुआ है।
सार्स (SARS )
नवंबर 2002 में चीन से SARS वायरस यानी सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम शुरू हुआ था। इसके बारे में जाना जाता है कि यह संभवत:चमगादड़ों से शुरु हुआ था। फिर बिल्लियों में फैला और फिर इंसानों में फैला था। उसके बाद ये 26 और देशों में फैला, जिससे 8 हजार लोग संक्रमित हुए और 774 लोगों की मौत हुई थी। 2003 जुलाई तक वायरस पर काबू पा लिया गया और तब से यह फिर से सामने नहीं आया हैष प्रकोप की शुरुआत में वायरस के बारे में जानकारी दबाने की कोशिश करने के लिए चीन की आलोचना की गई थी। नया कोरोना वायरस भी सार्स परिवार का ही सदस्य था।
बर्ड फ्लू (Bird Flu)
AVIAN फ्लू या बर्ड फ्लू एक वायरल संक्रमण है जो पक्षियों से पक्षियों में फैलता है। ये बीमारी संक्रमित मुर्गियों या अन्य पक्षियों के बेहद नजदीक रहने से फैलती है। विशेष रूप से मुर्गियों की अलग-अलग प्रजातियों से डायरेक्ट कॉन्टैक्ट में इंसानों में भी ये बीमारी फैलती है। इंसानों में ये वायरस मुंह, आंख और नाक के जरिए फैलता है। इस महामारी के कई स्वरूप लंबे समय से दुनिया के सामने आते रहे हैं लेकिन इस समय प्रचलित H5N1 पहली 1996 में चीन में सामने आया था। इसे हाई पैथोजिनेसिटी का वायरस माना जाता है।
WHO ने इस वायरस पर भी साधी चुप्पी
कोरोना के समय चीन ने दुनिया से अपने गुनाहों को छिपाया था। इस बार भी चीन इस वायरस के अटैक पर खामोश है। हालांकि खबर ये कि चीन के कई इलाको में अघोषित आपातकाल लग चुका है। अस्पतालों से लेकर श्मशान तक अलर्ट जारी हो चुका है। वहीं चीन की कदम में कदम मिलाते हुए इस नए वायरल पर WHO ने भी चुप्पी साध रखी है। अभी तक इस वायरस पर WHO ने कोई भी गाइडलाउन जारी नहीं किया है। बता दें कि कोरोना ने दुनिया में जिस वक्त तबाही मचाई और अनगिनत लोगों का जान ली, तब भी WHO ने काफी वक्त बाद उसे PENDAMIC घोषित किया था।
भारत के लिए कितना खतरनाक है ये वायरस
भारत मेंर इस वायरस को लेकर क्या स्थिति है और क्या यह वायरस भारत में भी फैल सकता है? इस पर डीजीएचएस ने तस्वीर साफ कर दी है। डायरेक्टर जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) डॉक्टर अतुल गोयल ने बताया, “चाइना में मेटान्यूमोवायरस का आउटब्रेक है और सीरियस है, लेकिन हमें ऐसा नहीं लगता कि क्योंकि यहां मेटान्यूमोवायरस एक नार्मल रेस्पिरेटरी वायरस है, जो ज़ुकाम जैसी बीमारी करता है या कुछ लोगों में फ्लू जैसे सिंप्टोम्स हो सकते हैं। खास तौर से ज़्यादा बुजुर्गों और 1 साल से कम वाले बच्चो में, लेकिन यह ऐसी कोई सीरियस बीमारी नहीं है, जिससे बहुत चिंता करने की जरूरत है।
देश को चिंता करने की ज़रूरत नहीं
DGHS ने यह भी साफ कर दिया है कि भारत मे सर्दियों में रेस्पिरेटरी डिजीज के केसेस बढ़ जाते हैं, लेकिन हर चीज पर नजर रखी जा रही है और फिलहाल डेटा के हिसाब से अभी तक कोई बहुत ज्यादा केसेस नहीं आ रहे हैं, नार्मल बढ़त जो सर्दियों में होती है वही है। अभी कुछ भी सीरियस नहीं है इसलिए देश को चिंता करने की जरूरत नहीं है।