शतक लगाने के बाद बदले-बदले से नजर आए पृथ्वी शॉ, कहा- मुझे किसी की भी सहानुभूति नहीं चाहिए

भारतीय टीम के बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने मंगलवार को बुची बाबू ट्रॉफी मैच के दौरान महाराष्ट्र के लिए खेलते हुए शतक जड़ा। छत्तीसगढ़ के खिलाफ गुरु नानक कॉलेज में शॉ ने 141 गेंदों पर 111 रन बनाकर प्रभाव छोड़ा। हालांकि शतकीय पारी खेलते के बाद पृथ्वी शॉ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी की सहानुभूति नहीं चाहते हैं। छत्तीसगढ़ द्वारा मिले 242 रनों का पीछा करते हुए महाराष्ट्र की टीम 217 रन ही बना सकी, जिसमें 111 रन अकेले पृथ्वी शॉ ने बनाए।

पृथ्वी शॉ के लिए क्रिकेट के मैदान पर पिछले कुछ साल काफी खराब रहे है। भारतीय टीम से बाहर किए जाने के बाद वह आईपीएल में भी कुछ खास नहीं कर पा रहे थे। उनके फिटनेस और अनुशासन को लेकर काफी चर्चा भी हुई। कई गलत कारणों की वजह से पृथ्वी शॉ सुर्खियों में रहे थे। हालांकि पिछले कुछ महीनों में शॉ को कई पूर्व क्रिकेटर्स से सपोर्ट मिला है और अब वह अपने क्रिकेट करियर को फिर से सही दिशा में ले जाने के लिए उत्सुक हैं।

पृथ्वी शॉ ने कहा, ”मुझे फिर से शुरू करने में कोई दिक्कत नहीं है। क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी में काफी उतार चढ़ाव देखे हैं। मैं एक बहुत ही आत्मविश्वासी इंसान हूं, मुझे खुद पर, अपने काम के तरीके पर पूरा भरोसा है। मुझे उम्मीद है कि यह सीजन मेरे और मेरी टीम के लिए वाकई अच्छा रहेगा।”

उन्होंने आगे कहा, ”मैं कुछ भी बदलना नहीं चाहता। मैं सिर्फ बेसिक्स पर गया, वहीं चीजें कर रहा हूं जो मैं अंडर-19 के दिनों से करता आ रहा है, जिससे मैं भारतीय टीम में पहुंचा था। फिर से वही सब चीजें कर रहा है। ज्यादा अभ्यास करना, जिम जाना, दौड़ना। जाहिर है, ये छोटी-छोटी चीजें हैं, ये कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि मैं ये सब 12-13 साल की उम्र से कर रहा हूं।”

पृथ्वी शॉ ने कहा, ”ये ठीक है, मैं किसी की सहानुभूति नहीं चाहता। ये ठीक है। मैंने पहले भी ऐसा देखा है। मुझे अपने परिवार का साथ मिला। और मेरे दोस्त भी, जो तब मेरे साथ थे जब मैं मानसिक रूप से ठीक नहीं थी। तो, सब ठीक है।”

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