संसद में वक्फ संशोधन बिल 2024 पेश होने के बाद जिले के अल्पसंख्यक समुदाय में इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।

संसद में वक्फ संशोधन बिल 2024 पेश होने के बाद जिले के अल्पसंख्यक समुदाय में इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। लोगों का मानना है कि संशोधन के बाद वक्फ बोर्ड की शक्तियां कम हो जाएंगी। वक्फ की संपत्तियों में प्रशासनिक दखल बढ़ जाएगी। यह स्थिति वफ्फ बोर्ड को काफी कमजोर करेगी क्योंकि प्रशासनिक अमले का काम करने का तरीका ही अलग होता है। लोगों का सर्वाधिक विरोध प्रशासनिक दखल को लेकर है। प्रयागराज में सुन्नी वक्फ बोर्ड की 3180 और शिया वक्फ बोर्ड की 258, यानी कुल 3438 संपत्तियां हैं। इनका संचालन, इनकी लीज आदि समस्त व्यवस्था वक्फ बोर्ड ही देखता है। बोर्ड के निर्देश पर ही यहां सभी काम होते हैं। केंद्र सरकार ने जो संशोधन बिल पेश किया है, उसमें वक्फ संपत्तियों का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करना होगा, वहीं वक्फ बोर्ड के अधिकार सीमित कर इस मामले पर जिलाधिकारी को निर्णय लेने की शक्तियां दी गई हैं, संशय इसी बात को लेकर है।

वक्फ बोर्ड के जानकार संशोधन के इस फैसले को गलत बता रहे हैं। इनका कहना है कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति कभी भी किसी व्यक्ति की नहीं रही। संपत्ति बोर्ड की होती है और बोर्ड तो सरकार का ही है। ऐसे में यह जमीन सरकार की ही रहती है। बोर्ड केवल रखरखाव के लिए केयरटेकर की तरह काम करता है, जो कि लीज पर जमीन देने का काम करता है, लेकिन बोर्ड की अनुमति से। इससे सरकार और बोर्ड की आय में इजाफा होता है। अब तक ऐसे मामलों को बोर्ड अपने नजरिए से देखता था, सवाल उठाया जा रहा है कि संशोधन के बाद क्या जिला प्रशासन भी इसे उसी तरीके से देखेगा।

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर सरकार का अपना पक्ष है। जिले में ऐसे तमाम मामले रहे हैं जब जमीन घोटाला हुआ है। पिछले दिनों सल्लाहपुर की जमीन का प्रकरण सबसे ज्वलंत उदाहरण है। जब तत्कालीन मुतवल्ली ने वक्फ संपत्ति नंबर 66, 67 और 68 को माफिया अशरफ व उसके सालों के नाम लीज पर दे दी थी। मामले में जब मंडलायुक्त के यहां शिकायत हुई तो जिला प्रशासन की तीन सदस्यीय कमेटी ने यह पाया कि जमीन बिना वक्फ बोर्ड की अनुमति लिए माफिया को लीज पर दी गई और इस पर दुकानें बनाई गईं व कुछ निर्माण हुए। कमेटी ने जमीन खाली कराने के साथ ही तत्कालीन मुतवल्ली को हटाने की संस्तुति भी की थी, जिस पर कार्रवाई हुई और मामला थाने में दर्ज भी है।

चक निरातुल में वक्फ बोर्ड की जमीन पर बड़ा शॉपिंग कांप्लेक्स बना लिया था। धीरे-धीरे जब जमीन पर कब्जे की शिकायत की गई तो मामला संज्ञान में आया। इसके बाद प्रशासन ने सख्त होकर संपत्ति से कब्जा हटाया और कांप्लेक्स भी हटाया गया।

वक्फ संपत्ति को लेकर प्रशासन पर भी मुकदमे होते रहे हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अफसरों ने बताया कि हाल फिलहाल एक केस पन्ना लाल रोड पर मस्जिद टूटने का है। यहां पर सड़क चौड़ीकरण का काम प्रस्तावित था। जिससे वक्फ की 252 नंबर की संपत्ति प्रभावित हो रही थी, जिसे तोड़ा गया। अफसरों ने बताया कि बाद में मुतवल्ली ने यह कहकर केस किया कि चौड़ीकरण के बाद मस्जिद तोड़ी गई। फिलहाल इस पर मामला विचाराधीन है।

संसद में पेश न‌ए विधेयक का मकसद वक्फ बोर्ड के कानूनों में पारदर्शिता लाना और बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है। अभी तक वक्फ बोर्ड की कमेटियां पुराने कानून का फायदा उठाते हुए निरंकुश होकर कार्य करती रही है, न्याय मिलने में वर्षों अनिश्चितता बनी रहती है। न‌ए कानून में ये खामियां दूर की गई है।–प्रवीण पटेल सांसद फूलपुर संसदीय क्षेत्र

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