रिपोर्ट के बाद अनिल अंबानी की कंपनी के शेयरों में भूचाल: मुनाफे के बाद अब नुकसान की संभावना

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर आज गुरुवार को कारोबार के दौरान फोकस में रहे। कंपनी के शेयर 4% तक गिरकर 66.25 रुपये पर आ गए। वहीं, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर 5% तक गिरकर 377 रुपये पर आ गए। शेयरों में इन गिरावट के पीछे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के लोन अकाउंट को फ्रॉड के रूप में क्लासिफाई करने के बाद रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में गुरुवार के कारोबार में गिरावट आई, जिसमें कंपनी के पूर्व निदेशक अनिल अंबानी भी शामिल हैं।

कंपनी के शेयरों के हाल

बीएसई पर रिलायंस पावर 4.8% गिरकर 64.75 रुपये पर आ गया, जबकि रिलायंस इंफ्रा 5% के निचले सर्किट पर 377.45 रुपये पर पहुंच गया। एसबीआई द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस के ऋण को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने और अनिल अंबानी को दोषी ठहराए जाने के बाद रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में भारी गिरावट आई। 2020 के फोरेंसिक ऑडिट के आधार पर यह कदम उठाया गया, जिसमें 12,692 करोड़ रुपये के डायवर्जन का आरोप लगाया गया। अंबानी की कानूनी टीम ने इस कार्रवाई को एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया, जिसमें दावा किया गया कि यह आरबीआई के मानदंडों और अदालती फैसलों का उल्लंघन करता है, जबकि लगभग एक साल तक उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया।

क्या है डिटेल

उद्योगपति अनिल अंबानी के वकील ने दिवालिया हो चुकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस के ऋण खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने का विरोध करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को पत्र लिखा है। दो जुलाई को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि एसबीआई के इस कदम ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों के साथ अदालती निर्देशों का भी उल्लंघन किया है। रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) ने बुधवार को शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा कि एसबीआई 2016 के एक मामले में कथित तौर पर पैसा दूसरी जगह भेजने का हवाला देते हुए उसके कर्ज खाते को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत कर रहा है। अनिल अंबानी के वकील ने कहा कि एसबीआई का आरकॉम के ऋण खातों को धोखाधड़ी वाला बताने का आदेश चौंकाने वाला एवं एकतरफा है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी उल्लंघन करता है। वकील ने कहा कि एसबीआई का आदेश उच्चतम न्यायालय और मुंबई उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों के साथ आरबीआई के दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है।

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