इंदौर में डीएवीवी परीक्षा में एआई का नकल में हुआ इस्तेमाल, 50 से ज्यादा चीटिंग के मामले सामने आए

नकल प्रकरण


इंदौर में डीएवीवी परीक्षा में एआई से नकल का खुलासा, 50 से अधिक मामले

इंदौर, मध्यप्रदेश: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में हाल ही में हुई सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाओं के दौरान नकल के नए और हाईटेक तरीके सामने आए हैं। विद्यार्थियों ने अब नकल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे चैट जीपीटी और जेमिनी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिससे नकल के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इस तरह की गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब डीएवीवी के उड़नदस्ते ने परीक्षा केंद्रों पर सख्ती से जांच की और विद्यार्थियों से मोबाइल फोन जब्त किए।

परीक्षा केंद्रों पर सख्ती के बावजूद नकल

  • मोबाइल से नकल: उड़नदस्तों की चेकिंग में करीब 7 छात्र-छात्राएं मोबाइल लेकर परीक्षा कक्ष में पहुंचे थे। जांच के दौरान पता चला कि इन विद्यार्थियों ने चैट जीपीटी और जेमिनी जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल किया था, जिनसे उन्होंने परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर खोजे थे। यह नकल का एक नया तरीका था, जो पहले कभी नहीं देखा गया था।
  • नकल के कुल 50 मामले: दिसंबर से मार्च तक आयोजित स्नातक, स्नातकोत्तर और व्यावसायिक सेमेस्टर परीक्षाओं में कुल 50 नकल प्रकरण सामने आए। इनमें से कुछ छात्रों ने परीक्षा के दौरान अपने एडमिट कार्ड के पीछे जवाब लिखकर लाए थे, जबकि कुछ ने किताबों और गाइड के पन्ने छिपा रखे थे।

नकल के नए तरीके

  • एडमिट कार्ड के पीछे लिखना: सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि लगभग 18 से अधिक छात्रों ने अपने एडमिट कार्ड के पीछे उत्तर लिखकर लाए थे, जो चेकिंग के दौरान पकड़े गए।
  • गाइड और किताबों का इस्तेमाल: कुछ विद्यार्थियों ने किताबों और गाइड के पन्ने भी अपने कपड़ों में छिपाए थे, जबकि कुछ ने जूतों में नकल सामग्री रखी थी।

नकल के मामलों में वृद्धि

डीएवीवी विश्वविद्यालय में पिछले कुछ सालों में नकल के मामलों में वृद्धि देखी गई है। 2022 से 2024 तक के बीच नकल के मामलों की संख्या 600 से अधिक थी। इन मामलों में से 60% छात्रों को एक-एक विषय में फेल कर दिया गया था, जबकि 3% छात्रों के पास अधिक मात्रा में नकल सामग्री पाई गई थी, जिससे उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी थी।

  • 2025 में सुधार: विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, 2025 में नकल के मामलों में कमी आई है और अब यह संख्या 250 से 300 के बीच रह गई है। यह विश्वविद्यालय के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि नकल पर काबू पाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद अब भी कुछ विद्यार्थियों की तरफ से नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था पर सवाल

परीक्षा केंद्रों पर सख्ती के बावजूद इस प्रकार की गड़बड़ियों का सामने आना केंद्रों की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। विश्वविद्यालय प्रशासन को अब परीक्षा केंद्रों की निगरानी और चेकिंग की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता है।

समापन

डीएवीवी के नकल प्रकरणों में बढ़ोतरी ने यह साबित कर दिया है कि जहां एक तरफ तकनीकी प्रगति हो रही है, वहीं कुछ विद्यार्थी इसका गलत तरीके से इस्तेमाल करने में भी माहिर हो रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को अब तकनीकी मदद से नकल करने की प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने के लिए नई रणनीतियों की आवश्यकता है।

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