देश की राजधानी दिल्ली में जहां एकतरफ प्रदूषण ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ यहां मच्छरों ने भी जमकर आतंक मचा रखा है। जिसके चलते अक्टूबर में यहां डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों का बीते चार साल का रिकॉर्ड टूट गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में अक्टूबर महीने में डेंगू के 2,400 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जो कि पिछले चार सालों में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा यह आंकड़ा सितंबर में सामने आए डेंगू के मामलों से दोगुना से भी ज्यादा तो है ही, साथ ही साल 2024 में अब तक किसी भी महीने में सामने आए कुल डेंगू मामलों से भी ज्यादा है।
बीते सालों में सामने आए डेंगू के मामलों की बात करें तो अक्टूबर 2023 में 2,003 मामले सामने आए थे। अक्टूबर 2022 में 1,238 मामले, 2021 में 1,196 मामले और 2020 में 346 मामले सामने आए थे।
इस साल अब तक सामने आए डेंगू के कुल मामलों की बात करें तो इसकी संख्या 4,061 हो चुकी है, जिनमें तीन मौतें भी इस बीमारी के कारण हुई हैं। पिछले साल की बात करें तो 2023 में अक्टूबर के अंत तक डेंगू के कुल 6,003 मामले सामने आए थे, जबकि पूरे साल के दौरान कुल 9,266 मामले सामने आए थे।
पिछले चार सालों की तुलना में इस साल अक्टूबर महीने में डेंगू के अलावा मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले सामने आने का रिकॉर्ड भी टूट गया और इन दोनों बीमारियों के केस भी अधिकतम स्तर पर पाए गए हैं।
इस साल मलेरिया के मामलों में भी काफी बढ़ोतरी देखी गई। अक्टूबर 2024 में मलेरिया के 279 मामले दर्ज किए गए, जबकि इससे पहले के तीन सालों में यह संख्या सिर्फ दो अंकों में ही थी। 2023 में 37, 2022 में 75, 2021 में 47 और 2020 में 34 मामले मलेरिया के सामने आए थे।
इसी तरह, बीते महीने चिकनगुनिया के मामले 96 मामले सामने आए। जबकि अक्टूबर 2023 में यह संख्या केवल 5 थी। 2022 में 17 मामले सामने आए थे। 2021 में 25 मामले और 2020 में 17 मामले पाए गए थे।
अच्छी बात यह है कि आंकड़ों के अनुसार, 2 नवंबर को खत्म सप्ताह में दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों का कोई मामला सामने नहीं आया।
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में दिल्ली भारत का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां औसत PM 2.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी। स्वतंत्र थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण से पता चला है कि अक्टूबर में भारत के सभी शीर्ष 10 प्रदूषित शहर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्थित थे।
इन शहरों में गाजियाबाद (110 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), मुजफ्फरनगर (103), हापुड़ (98), नोएडा (93), मेरठ (90), चरखी दादरी (86), ग्रेटर नोएडा (86), गुरुग्राम (83) और बहादुरगढ़ (83) शामिल हैं। दिल्ली का अक्टूबर का औसत सितंबर के औसत 43 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 2.5 गुना अधिक था।
CREA विश्लेषण ने आगे दिखाया कि अक्टूबर में दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम थी। पीएम 2.5 की बढ़ी हुई सांद्रता मुख्य रूप से वर्ष भर मौजूद स्रोतों के कारण हुई।