पुष्प प्रदर्शनी 2026 में औषधीय पौधों का अद्भुत संसार: औषधि पादप बोर्ड का स्टॉल बना लोगों की पहली पसंद

औषधीय पौधे


राजधानी रायपुर के नेहरू-गांधी उद्यान में 09 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित प्रदेश स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी न केवल फूलों की खूबसूरती के लिए याद की जाएगी, बल्कि औषधीय ज्ञान और पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा की खास प्रस्तुति के लिए भी चर्चा में रही। इस प्रदर्शनी में वन विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा लगाया गया स्टॉल लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा।


औषधीय पौधों की अनूठी झलक

प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा आयोजित इस भव्य प्रदर्शनी में फूल, फल, सब्जियां और बोनजाइ की कई प्रजातियां प्रदर्शित की गईं, लेकिन औषधि पादप बोर्ड द्वारा लगाए गए स्टॉल ने दर्शकों को खास तौर पर आकर्षित किया।

स्टॉल की मुख्य विशेषताएं:

  • छत्तीसगढ़ के वनों में पाए जाने वाले 50 स्थानीय औषधीय एवं सुगंधित पौधों का सजीव प्रदर्शन
  • पौधों की वास्तविक पहचान और उपयोग की जानकारी
  • पारंपरिक और वैज्ञानिक ज्ञान का सुंदर समन्वय

हर वर्ग के लिए उपयोगी जानकारी

औषधि पादप बोर्ड के विशेषज्ञ कर्मियों ने स्टॉल पर आने वाले दर्शकों को बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में जानकारी दी। यह जानकारी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए लाभकारी रही।

दर्शकों को दी गई अहम जानकारियां:

  • कौन-सा औषधीय पौधा किस बीमारी में उपयोगी है
  • पौधों का वैज्ञानिक नाम
  • पौधे के किस भाग का उपयोग करना चाहिए
  • सही मात्रा और उपयोग का उपयुक्त समय

इससे लोगों को रोजमर्रा की छोटी-मोटी बीमारियों में प्राकृतिक उपचार अपनाने की समझ विकसित हुई।


होम हर्बल गार्डन जैसी योजनाओं का प्रचार

प्रदर्शनी के दौरान औषधि पादप बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं की भी जानकारी दी गई, जिसने लोगों में खास उत्साह पैदा किया।

प्रमुख योजनाएं:

  • होम हर्बल गार्डन योजना – निःशुल्क औषधीय पौधों का वितरण
  • औषधीय एवं सुगंधित पौधों के कृषिकरण को बढ़ावा
  • पारंपरिक औषधीय ज्ञान को रोजगार से जोड़ने के प्रयास

इन योजनाओं का उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और प्राकृतिक चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाना है।


50 हजार से अधिक लोगों ने देखा स्टॉल

तीन दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी के दौरान औषधि पादप बोर्ड के स्टॉल को 50 हजार से अधिक दर्शकों ने देखा और सराहा। बड़ी संख्या में लोगों ने:

  • औषधीय पौधों के बारे में जानकारी ली
  • प्रचार सामग्री प्राप्त की
  • पारंपरिक वन-औषधि ज्ञान में रुचि दिखाई

यह उत्साह इस बात का संकेत है कि लोग अब रसायन आधारित इलाज के साथ-साथ प्राकृतिक विकल्पों को भी गंभीरता से अपनाना चाहते हैं।


छत्तीसगढ़ की परंपरा और प्रकृति का संदेश

यह पहल छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और आदिवासी स्वास्थ्य परंपरा को नई पहचान देने में सफल रही। औषधीय पौधों का यह प्रदर्शन न केवल ज्ञानवर्धक था, बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब लाने वाला भी साबित हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *