इजरायल को बचाने के लिए सीक्रेट मिलिट्री बेस पर तैनात अमेरिकी परमाणु बॉम्बर

अमेरिका ने अपने B-2 Nuclear Stealth बॉम्बर को हिंद महासागर के सीक्रेट मिलिट्री बेस डिएगो गार्सिया आइलैंड पर तैनात किया है. ये कदम इसलिए उठाया गया है ताकि इजरायल को ईरान के हमले से बचाया जा सके. अमेरिका ने इसके अलावा अपनी नौसेना के 30 फीसदी युद्धपोतों को मिडिल-ईस्ट में तैनात कर रखा है. 

डिएगो गार्सिया द्वीप इजरायल से 5842 किलोमीटर और ईरान से 4842 किलोमीटर दूर है. अगर यह बमवर्षक चाहे तो ये दूरियां चार से पांच घंटे में पूरी कर सकता है. क्योंकि इस बमवर्षक की रेंज करीब 11 हजार किलोमीटर है. यानी ये ईरान जाकर बम या मिसाइल गिराकर वापस अपने मिलिट्री बेस पर आ सकत है. 

बी-2 न्यूक्लियर स्टेल्थ बॉम्बर को दो लोग उड़ाते हैं. एक पायलट और दूसरा मिशन कमांडर. 69 फीट लंबे इस बमवर्षक के पंखों की लंबाई 172 फीट है. 17 फीट ऊंचे बमवर्षक का खाली वजन 71,700 किलोग्राम होता है. जबकि पूरे हथियारों के साथ यह 1.70 लाख किलोग्राम वजन लेकर उड़ टेकऑफ कर सकता है. 

इसकी अधिकतम गति 1010 किलोमीटर प्रतिघंटा है. आमतौर पर यह 900 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से क्रूज करता है. यानी उड़ान भरता है. यह आसमान में अधिकतम 50 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. अब जानते हैं इसमें लगने वाले हथियारों के बारे में… 

इस बमवर्षक में दो इंटरनल बे हैं. यानी इसके पेट के अंदर बम रखे जाते हैं. टारगेट पर पहुंचने से पहले इंटरनल बे का दरवाजा खुलता है. उसमें से बम गिरते हैं. इस बमवर्षक के अंदर 230 किलोग्राम वजन के एमके-82 और जीबीयू-38 बमों को बॉम्ब रैक असेंबली में रखा जाता है. ऐसे करीब 80 बम रखे जा सकते हैं. 

या 340 किलोग्राम के 36 सीबीयू क्लास बम को लगाया जा सकता है. इसके अलावा इसके रोटरी लॉन्चर असेंबली है, जिसमें 910 किलोग्राम के 16 बम लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा 16 B61 या B83 न्यूक्लियर बम लगाए जा सकते हैं. 

अमेरिकी सेना इसमें AGM-154 ज्वाइंट स्टैंडऑफ वेपन और AGM-158 ज्वाइंट एयर टू सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल भी तैनात करती है. इसके अलावा इसमें दो जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर बम लगाए जा सकते हैं. ये बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार हैं. 

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