आरोपी तफाजुल इस्लाम इस केस का मुख्य आरोपी बताया जा रहा था. पुलिस आरोपी को सुबह 4 बजे क्राइम सीन पर ले जा रही थी. इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि गैंगरेप का ये आरोपी डूब कर मरा या फिर डुबो दिया गया. क्योंकि जब आरोपी डूबा तो वो पुलिस के साथ था. उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की थी, लेकिन पुलिस कह रही है कि उसने भागने की कोशिश की. और तालाब में डूबकर मर गया.
दरअसल, असम के सीएम हिमंता ने एक दिन पहले ही यानी 23 अगस्त को कहा था कि सरकार को ऐसे मामलों में अग्रेसिव दिखना चाहिए. उनके इस बयान के 24 घंटे भी नहीं बीते कि ये घटना हो गई.
डूबने या डुबो देने की ये थ्योरी असम में खूब गूंज रही है, लेकिन सवाल उठाने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा. पुलिस की हिरासत में हाथ में हथकड़ी थी, लेकिन वो तालाब में कूद गया. ऐसे में सवाल पुलिस को लेकर भी है कि क्या पुलिस सतर्क नहीं थी? पुलिस उसको सुबह 4 बजे लेकर क्यों जा रही थी? हाथ में हथकड़ी थी तो पानी में कैसे कूदा? अगर पानी में कूद गया तो पुलिसवालों ने तुरंत पानी में कूदकर उसकी जान क्यों नहीं बचा ली? आरोपी राज्य के एक चर्चित गैंगरेप कांड का आरोपी था. उसे सजा दिलाना पुलिस का फर्ज था.
अलबत्ता लोग खुश हैं कि आरोपी तफाजुल इस्लाम की मौत हो गई. इस मामले में कानूनी जंग बाकी थी, लेकिन तफाजुल इस्लाम को लेकर लोग इस कदर खफा हैं कि उसके जनाजे तक में शामिल होने को तैयार नहीं हैं और ना ही दफनाने के लिए कब्रिस्तान में जगह देने को तैयार हैं.
ये हैरत की बात है कि इतने बड़े कांड के आरोपी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई. दोनों बड़ी पार्टियों के नेताओं से लेकर स्थानीय लोग तक इस मौत को लेकर खुशी जता रहे हैं. असम के सीएम हिमंता ने कल इंसाफ का भरोसा दिया था और कहा था कि किसी भी आरोपी को बख्शेंगे नहीं. वहीं, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने इस मामले में आज कहा कि एक आरोपी ने भागने की कोशिश की और वह तालाब में डूब गया और उसकी मौत हो गई. कोलकाता की घटना के साथ अगर इस घटना की तुलना की जाए तो हम ये स्पष्ट करना चाहते हैं कि असम में कोई घटना होने पर पुलिस तुरंत एक्शन लेती है और अपराधी को पकड़ लेती है. ऐसी घटना में हम लोग जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाते हैं.