शेयर बाजार में बिकवाली के बीच शुक्रवार को रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव रहा। एक पॉजिटिव खबर की वजह से अनिल अंबानी की इस कंपनी के शेयर इंट्रा-डे के दौरान करीब 8% उछल गए। बीएसई पर रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयर दिन के निम्नतम स्तर 269 रुपये से बढ़कर 290.70 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। हालांकि, इसके बाद मुनाफावसूली देखी गई और शेयर एक बार फिर निगेटिव जोन में ट्रेड करने लगा। आइए जानते हैं कि आखिर रिलायंस के शेयर में अचानक तेजी क्यों आई।
क्या है पॉजिटिव खबर
दरअसल, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनियों- BSES यमुना पावर, BSES राजधानी पावर ने लगभग 21,413 करोड़ रुपये की रेग्युलेटरी एसेट्स की वसूली की योजना की घोषणा की। दिल्ली के बिजली ग्राहकों से यह रिकवरी अगले 4 साल में की जाएगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में रिलायंस इन्फ्रा की सहायक कंपनियों BSES डिस्कॉम, BSES यमुना पावर लिमिटेड और BSES राजधानी पावर लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका और सिविल अपील पर यह फैसला सुनाया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने रेग्युलेटरी एसेट्स के मुद्दे पर विचार करने के लिए दस प्रमुख दिशानिर्देश तय किए हैं।
रेग्युलेटरी एसेट्स क्या है?
रेग्युलेटरी एसेट्स, किसी कंपनी की बैलेंस शीट का एक फंड होता है, जिसे रेग्युलेटरी बॉडी द्वारा अप्रूव की जाती है और इसे ग्राहकों से वसूलने का अधिकार कंपनियों को होता है। आसान भाषा में समझें तो कंपनियों को यह अधिकार मिलता है कि वह अपने ग्राहक से लागत वसूल सकें।
आमतौर पर ये उस तरह की लागत है जिसे कंपनी को खर्च अभी करने पड़ते हैं लेकिन नियमों के कारण तुरंत ग्राहकों से वसूल नहीं सकती। कंपनी इसे कुछ सालों में धीरे-धीरे ग्राहकों से वसूल सकती है। इस खर्च को कंपनी अपने बैलेंस सीट में रेग्युलेटरी एसेट के रूप में दर्ज करती है। मतलब ये कि यह भविष्य में वसूली योग्य रकम है।
शेयर का परफॉर्मेंस
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयर की कीमत एक महीने में 24% गिर गई लेकिन तीन महीनों में 22% बढ़ गई। हालांकि इस शेयर में साल-दर-साल (YTD) आधार पर 11% की गिरावट आई है लेकिन इसने दो सालों में 46% रिटर्न दिया है। वहीं, पांच साल में 900% का मल्टीबैगर रिटर्न दे चुका है।