कश्मीर में कैसे पहुंच रहे अमेरिकी हथियार, M4 कार्बाइन राइफलें बरामद; सेना लगाएगी पता

भारतीय सेना अमेरिकी हथियारों का दस्तावेजीकरण कर रही है, जो संभवतः अफगानिस्तान के रास्ते कश्मीर पहुंचे हैं। घाटी में सेना के शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। श्रीनगर स्थित चिनार कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि ऐसे हथियारों का पता लगाने के लिए अमेरिका के साथ यह मुद्दा उठाने के प्रयास किए जा रहे हैं। घाटी की सुरक्षा के लिहाज से इसे चिंताजनक माना जा रहा है। घई ने अफगानिस्तान से आए अमेरिकी हथियारों की घाटी में बरामदगी पर चिंताओं के बारे में पूछे गए सवाल पर यह जबाव दिए।

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा, ‘मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, क्योंकि यह हमारी खुफिया एजेंसियों के विशिष्ट क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मेरा मानना ​​है कि वे इस बारे में अधिक जानकारी प्रदान करने में सक्षम होंगे कि ये हथियार कहां से आ रहे हैं और वे हमारे देश के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख रखने वाले लोगों के हाथों में कैसे पहुंच रहे हैं।’ लेफ्टिनेंट जनरल घई ने इन हथियारों का दस्तावेजीकरण करने और लोगों की ओर से इसके बारे में जानकारी मांगने के संबंध में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से जारी है और मैं इसकी पुष्टि कर सकता हूं।

सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ों में मारे गए आतंकवादियों के पास से एम4 कार्बाइन असॉल्ट राइफलें बरामद की हैं। ऐसा मालूम होता है कि 2021 में अफगानिस्तान से वापसी के बाद अमेरिकी सेना की ओर से छोड़े गए हथियार पाकिस्तानी आकाओं के माध्यम से आतंकवादियों तक पहुंचे हैं। साल 1980 के दशक में डिजाइन और विकसित की गई M4 कार्बाइन राइफलों का व्यापक रूप से उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) की ओर से उपयोग किया गया है। बताया जाता है कि पाकिस्तानी विशेष बलों और सिंध पुलिस की विशेष सुरक्षा इकाई सहित कई सेनाओं की ओर से भी इनका इस्तेमाल किया गया है।

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने यह भी बताया कि कश्मीर में अब लगभग 80 सक्रिय आतंकवादी हैं जो पिछले वर्षों में सबसे कम संख्या है। श्रीनगर में सेना की 15 कोर के मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घई ने कहा कि मल्टी-एजेंसी सेंटर की ओर से बताई गई आधिकारिक संख्या लगभग 80 है। यह कई वर्षों में सबसे कम है। उन्होंने आतंकवादियों की मौजूदगी के लिए बाहरी ताकतों (विशेष रूप से पाकिस्तान) को जिम्मेदार ठहराया, जो इस क्षेत्र में आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए संख्या को महत्वपूर्ण सीमा पर रखते हैं। लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा , ‘जब मैंने पिछले साल कमान संभाली थी तब वे 100 के आंकड़े को पार करने वाली संख्या से निपट रहे थे। अब यह आंकड़ा कम हो गया है।’

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