महाराष्ट्र में चुनावी अखाड़ा सज चुका है। जो कभी एक दूसरे के साथी हुआ करते थे आज सियासी दुश्मनी अदा कर रहे हैं। वहीं राजनीति के गलियारों के दुश्मन गठबंधन करके साथ चुनाव लड़ रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज शरद पवार और बालासाहेब ठाकरे की विरासत को संभालने का दावा करने वाले उद्धव ठाकरे एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। आपको बता दें कि बालासाहेब ठाकरे के रहते एनसीपी और शिवसेना के रास्ते हमेशा ही एक नदी के दो किनारों की तरह रहे। बालासाहेब ठाकरे शरद पवार को सियासी विरोध ही मानते थे लेकिन उनकी व्यक्तिगत दोस्ती भी किसी से छिपी नहीं थी।
बालासाहेब ठाकरे के व्यक्तित्व का सानी आज भी कोई नहीं है। वह जब तक जीवित रहे सियासी गलियारों में शरद पवार का विरोध ही करते रहे। वहीं दोनों परिवारों के बीच दोस्ती भी बनी रही। बालासाहेब ठाकरे शरद पवार को हल्के अंदाज में शराबी कहा करते थे। जबकि बालासाहेब खुद बीयर और सिगरेट पिया करते थे।
राजनीतिक दुश्मनी में भी दोस्ती निभाने का उनका अंदाज बेहद निराला था। शरद पवार की बेटी जब राज्यसभा का चुनाव लड़ रही थीं तो पहले इस बात का पता बालासाहेब को नहीं चला। बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने अपना भी प्रत्याशी उतार दिया। हालांकि बालासाहेब को पता चलते ही उन्होंने तुरंत फैसला किया कि गठबंधन का प्रत्याशी राज्यसभा की सीट के लिए चुनाव नहीं लड़ेगा। उन्होंने पवार से शिकायत के अंदाज में कहा था कि सुप्रिया भी मेरी बेटी है। तुमने बताया नहीं कि वह चुनाव लड़ रही है। अब गठबंधन की तरफ से उसके खिलाफ कोई मैदान में नहीं उतरेगा। पवार ने बीजेपी के बारे में पूछा तो उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, कमलाबाई की चिंता तुम ना करो।
बालासाहेब ठाकरे ने अपने पूरे जीवन में कभी कांग्रेस का समर्थन नहीं किया। वह कहते थे कि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन कभी नहीं हो सकता। वह अकसर इंदिरा गांधी पर तंज कसते हुए कार्टून भी बनाया करते थे। हालांकि आपातकाल के दौरान वह इंदिरा गांधी के समर्थन में खड़े हो गए थे। उन्होंने मुंबई इंदिरा गांधी का भव्य स्वागत किया था। वहीं 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में विजय के बाद उन्होने इंदिरा गांधी की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि वह जो चाहती हैं करके दिखा देती हैं।