रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को बालोद जंबूरी आयोजन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सरकार से जंबूरी आयोजन में हुए खर्च का ब्यौरा मांगा और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
जवाब में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि जंबूरी आयोजन के दौरान शौचालय निर्माण, जल व्यवस्था, प्रकाश, ध्वनि, आवास और डोम जैसी व्यवस्थाओं पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं रायपुर के किराया भंडार को 5 करोड़ 18 लाख 88 हजार रुपये का टेंडर दिया गया था।
इस पर उमेश पटेल ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि निविदा को डाउनग्रेड करने की अनुमति क्या स्काउट-गाइड संगठन ने दी थी। उन्होंने राज्य स्काउट-गाइड परिषद के अध्यक्ष को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
अध्यक्ष पद को लेकर उठा विवाद
मंत्री गजेंद्र यादव ने सदन को बताया कि राज्य स्काउट-गाइड परिषद के पदेन अध्यक्ष शिक्षा मंत्री होते हैं, जबकि इसके संरक्षक मुख्यमंत्री होते हैं और वही अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपते हैं। इस पर उमेश पटेल ने कहा कि बृजमोहन अग्रवाल सहित रायपुर सांसद भी स्वयं को अध्यक्ष बताते हैं, जबकि मंत्री भी स्वयं को अध्यक्ष बता रहे हैं।
इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि बृजमोहन अग्रवाल के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ ही उनके सभी दायित्व स्वतः समाप्त हो गए।
जंबूरी विवाद से राज्य की छवि खराब हुई: भूपेश
बहस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि जंबूरी विवाद के कारण छत्तीसगढ़ की छवि खराब हुई है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद को लेकर विवाद अभी भी अदालत में लंबित है और भाजपा के सांसद ही इस मामले को कोर्ट तक लेकर गए हैं।
भूपेश बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर मिलने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था, जिससे मिलीभगत की आशंका जाहिर होती है।
जांच की मांग ठुकराई, विपक्ष का बहिर्गमन
कांग्रेस विधायकों ने पूरे मामले की विधानसभा समिति से जांच कराने की मांग की। हालांकि शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि आयोजन में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है और जांच की आवश्यकता नहीं है।
इस जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सदन में हंगामा करते हुए अंततः बहिर्गमन कर दिया।