मध्य प्रदेश IAS ट्रांसफर
मध्य प्रदेश IAS ट्रांसफर को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। राज्य सरकार ने शनिवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 11 आईएएस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया। इस फैसले के बाद विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर आबकारी विभाग के कथित भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा रात लगभग 1:55 बजे जारी आदेश में कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
किन अधिकारियों का हुआ तबादला?
जारी आदेश के अनुसार प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
- अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बरनवाल को स्वास्थ्य विभाग का प्रभार दिया गया।
- संदीप यादव को वन विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया, साथ ही एनआरआई विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।
- वरिष्ठ अधिकारी मनीष सिंह को दोबारा जनसंपर्क आयुक्त नियुक्त किया गया, वे परिवहन सचिव का अतिरिक्त दायित्व भी संभालेंगे।
- दीपक सक्सेना को आबकारी आयुक्त बनाया गया।
- अभिजीत अग्रवाल को राज्य सहकारी विपणन महासंघ का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया।
गौरतलब है कि अग्रवाल का तबादला नई उत्पाद शुल्क नीति लागू होने से ठीक पहले हुआ है।
अन्य प्रमुख नियुक्तियां
- अजय गुप्ता को जबलपुर स्थित पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का प्रबंध निदेशक बनाया गया।
- उमाशंकर भार्गव ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास निदेशक का पद संभाला।
- सुनील दुबे को राज्यपाल का उप सचिव नियुक्त किया गया।
- संघमित्रा गौतम को अलीराजपुर जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया।
- नंदा भालवे कुशरे को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में अतिरिक्त परियोजना निदेशक नियुक्त किया गया।
- कमल सोलंकी को रायसेन जिला पंचायत का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस फेरबदल पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए उठाया गया है।
पार्टी ने आरोप लगाए:
- इंदौर में 75 करोड़ रुपए के कथित फर्जी चालान
- जबलपुर में जहरीली शराब से 15 से अधिक मौतें
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा—“तबादला हो गया, लेकिन जवाबदेही का क्या?”
सियासत क्यों तेज?
यह प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब नई उत्पाद शुल्क नीति लागू होने वाली है। ऐसे में आबकारी विभाग में हुए बदलाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
सरकार की ओर से फिलहाल इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मध्य प्रदेश IAS ट्रांसफर अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर सियासी घमासान और बढ़ने के आसार हैं।