PSLV-C62 मिशन
PSLV-C62 मिशन: इसरो के भरोसेमंद रॉकेट को झटका
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए सोमवार का दिन चुनौतीपूर्ण रहा, जब उसका PSLV-C62 मिशन अपने सफल प्रक्षेपण के बावजूद अंतिम लक्ष्य हासिल नहीं कर सका। रॉकेट ने उड़ान के शुरुआती चरणों में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी के कारण वह उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं (ऑर्बिट) में स्थापित करने में असफल रहा।
इस मिशन के तहत DRDO का महत्वपूर्ण उपग्रह ‘अन्वेषा’ और 15 अन्य छोटे उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे जाने थे, लेकिन दिशा-नियंत्रण में आई समस्या के चलते मिशन को सफल घोषित नहीं किया जा सका।
क्या कहा इसरो ने?
ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि—
- रॉकेट ने तीसरे चरण के दौरान अपनी ओरिएंटेशन (दिशा-स्थिति) पर नियंत्रण खो दिया
- यही कारण रहा कि उपग्रहों की सही ऑर्बिट में तैनाती नहीं हो सकी
- यह लगातार दूसरा PSLV मिशन है, जिसमें तीसरे चरण में समस्या सामने आई
पोस्ट में यह भी कहा गया कि स्थिति फिलहाल अनुकूल नहीं है और विस्तृत विश्लेषण जारी है।
इसरो प्रमुख ने की विफलता की पुष्टि
इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा—
- PSLV-C62 के पहले तीन चरण पूरी तरह सामान्य रहे
- इसके बाद एक विसंगति (Anomaly) सामने आई
- उड़ान अपने तय मार्ग से भटक गई, जिससे मिशन सफल नहीं हो सका
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक टीम मिशन से जुड़े सभी डेटा का गहन विश्लेषण कर रही है और जल्द ही विफलता के सटीक कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
अन्वेषा के साथ थे 15 अन्य उपग्रह
इस मिशन की खास बात यह थी कि इसमें—
- DRDO का ‘अन्वेषा’ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट
- 15–18 छोटे उपग्रह
- भारतीय स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालयों के सैटेलाइट
शामिल थे।
विशेष रूप से—
- हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस ने 7 उपग्रहों में योगदान दिया
- इनमें से 4 उपग्रह कंपनी द्वारा स्वयं विकसित किए गए थे
- ये उपग्रह कम डेटा रेट संचार के लिए डिजाइन किए गए थे
व्यावसायिक मिशन के लिए भी था अहम
PSLV-C62 मिशन—
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा संचालित
- 9वां व्यावसायिक अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन
- अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण
था।
हालांकि, 12 जनवरी को हुए लॉन्च के बाद रॉकेट को ऑर्बिट में सटीक रूप से स्थापित करने में असफलता मिली, जिससे व्यावसायिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर असर पड़ा।
PSLV की मजबूत विरासत पर सवाल नहीं
हालांकि इस असफलता ने चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन PSLV को अब भी दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल्स में गिना जाता है। यह रॉकेट—
- चंद्रयान-1
- मंगलयान
- आदित्य-L1
जैसे ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विफलता से इसरो सीख लेकर भविष्य के मिशनों को और मजबूत बनाएगा।
आगे क्या?
- वैज्ञानिक डेटा का विस्तृत विश्लेषण जारी
- तीसरे चरण की तकनीकी समीक्षा
- भविष्य के PSLV मिशनों में सुधार की संभावना