वोटर लिस्ट नागरिकता
वोटर लिस्ट और नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
कोलकाता से जुड़ी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट और नागरिकता को लेकर बेहद अहम बात रखी है। आयोग ने साफ कहा है कि अगर किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर जरा सा भी संदेह है, तो उसका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
हालांकि, चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है। नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास ही है।
क्या कहा चुनाव आयोग ने?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची शामिल थे, के समक्ष चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने स्थिति स्पष्ट की।
चुनाव आयोग के अनुसार:
- ईआरओ (Electoral Registration Officer) नागरिकता का अंतिम फैसला नहीं करता
- लेकिन अगर नागरिकता पर संदेह है तो नाम वोटर लिस्ट में नहीं जोड़ा जाएगा
- SIR प्रक्रिया का उद्देश्य गैर-नागरिकों को मतदाता सूची से हटाना है
- आयोग के पास न तो नागरिकता रद्द करने का अधिकार है और न ही देश से बाहर करने का
सुप्रीम कोर्ट का सवाल: वोट का अधिकार कब मिलेगा?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने एक अहम सवाल उठाया:
क्या किसी व्यक्ति को तब तक मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा, जब तक केंद्र सरकार उसकी नागरिकता तय नहीं कर देती?
इस पर आयोग के वकील ने जवाब दिया कि:
- SIR प्रक्रिया केवल मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए है
- यह नागरिकता तय करने की प्रक्रिया नहीं है
- नागरिकता का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार ही लेती है
SIR प्रक्रिया पर तृणमूल कांग्रेस की आपत्ति
इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसद – डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
तृणमूल की प्रमुख आपत्तियां:
- SIR से जुड़े निर्देश सोशल मीडिया पर जारी किए जा रहे हैं
- बीएलओ को व्हाट्सएप के जरिए आदेश दिए जा रहे हैं
- मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने की कोई रसीद नहीं दी जा रही
- प्रक्रिया में तार्किक विसंगतियां हैं
अभिषेक बनर्जी भी पहले उठा चुके हैं सवाल
तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी पहले ही इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के सामने आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया से वैध मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है।
आगे क्या?
- इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी
- सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अदालत में दोबारा शुरू होगी
- फैसला वोटर लिस्ट और नागरिकता से जुड़े लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है
क्यों है यह मामला बेहद अहम?
- वोटर लिस्ट नागरिकता से सीधा जुड़ा संवैधानिक मुद्दा
- लोकतंत्र और मतदान अधिकार पर बड़ा असर
- आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक और कानूनी दोनों रूप से संवेदनशील
👉 यह मामला न सिर्फ बंगाल, बल्कि पूरे देश की चुनावी प्रक्रिया के लिए एक नज़ीर बन सकता है।