“विकसित भारत 2047”
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नयी दिल्ली: उपराष्ट्रपति श्री सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह के दौरान 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को पूरा करने में छात्रों और युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यह समय है जब देश को एक स्थिर, समृद्ध और समावेशी भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार होना चाहिए।
विकसित भारत का विज़न:
राधाकृष्णन ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए चार प्रमुख तत्वों की आवश्यकता बताई:
- आर्थिक विकास
- सामाजिक समावेश
- तकनीकी उन्नति
- पर्यावरण स्थिरता
उन्हें विश्वास है कि यदि ये चार बुनियादी सिद्धांत मजबूत होते हैं तो भारत एक समृद्ध राष्ट्र के रूप में उभरेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में सबसे बड़ी जिम्मेदारी हमारे छात्रों और युवाओं पर है।
समानता और समावेशी विकास पर जोर:
उपराष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि विकसित भारत का विज़न समानता और समावेशी विकास पर आधारित होना चाहिए, जिसमें न तो किसी राज्य और न ही किसी समाज के वर्ग को पीछे छोड़ा जाएगा। यह दृष्टिकोण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि सभी भारतीयों को समान अवसर और समृद्धि मिले।
हिमाचल प्रदेश की प्रशंसा:
श्री राधाकृष्णन ने हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि’ और ‘वीरभूमि’ के रूप में सम्मानित किया और राज्य की समृद्ध आतिथ्य सत्कार, जीवंत संस्कृति और चिरस्थायी परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने भारतीय सशस्त्र सेनाओं में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यह राज्य अपने युवाओं को उच्च शिक्षा और अन्य अवसरों के लिए प्रोत्साहित करता है।
भारत की शैक्षणिक विरासत:
उपराष्ट्रपति ने भारत की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का उल्लेख करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला जैसे महान प्राचीन शिक्षा केंद्रों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के गुरु और आचार्य जीवनभर अपने ज्ञान को निखारते रहते थे और विचार-विमर्श के माध्यम से नए विचारों और सभ्यताओं का निर्माण करते थे। यह भारतीय शिक्षा प्रणाली की परंपरा थी, जिसे आज के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को भी अपनाना चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव:
उन्होंने हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उत्साहपूर्वक पालन की सराहना की। विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपराओं से संबंधित विषयों का समावेश किया जा रहा है, जिससे शिक्षा की नई संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा डोगरी में रचनाओं का अनुवाद करने की पहल और हिंदी साहित्य का पंजाबी में अनुवाद करना, भारतीय शोध पद्धतियों और स्वदेशी चिंतन पर जोर देने का एक अच्छा उदाहरण है।
उच्च शिक्षा में सहयोग की आवश्यकता:
श्री राधाकृष्णन ने केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि संयुक्त अनुसंधान, साझा संकाय विशेषज्ञता, और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से ऐसी साझेदारियां एक व्यापक शिक्षण समुदाय का निर्माण कर सकती हैं, जिससे छात्रों और विद्वानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान करने का मौका मिलेगा।
स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया:
उपराष्ट्रपति ने स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलें भी युवाओं के लिए नए रास्ते खोलने वाली बताई। उनका कहना था कि इन पहलों ने युवा नवप्रवर्तकों को प्रेरित किया है, जिनका योगदान भारत की विकास यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। इसके अलावा, उन्होंने विश्वविद्यालय की ‘कम्युनिटी लैब’ पहल की भी सराहना की, जिसके द्वारा छात्र और संकाय सदस्य आस-पास के समुदायों से जुड़ते हैं और ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं को समझने में मदद करते हैं।