पंडित दीनदयाल उपाध्याय
रायपुर में 11 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्पण दिवस के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। भाजपा जिला कार्यालय, एकात्म परिसर रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें नमन करते हुए उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर, वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर और सांसद संतोष पाण्डेय सहित अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
🌼 विचारों से वटवृक्ष बनी भाजपा
जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा लगाया गया भारतीय जनता पार्टी का पौधा आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।
उन्होंने कहा:
- “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का मंत्र उनके विचारों से प्रेरित है।
- पिछले वर्षों में देश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा है।
- अंत्योदय का सिद्धांत भाजपा की नीतियों की आधारशिला है।
🧠 एकात्म मानववाद का दर्शन
मुख्य वक्ता अजय चंद्राकर ने अपने संबोधन में कहा कि 22 अप्रैल 1965 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने पहली बार एकात्म मानववाद का सिद्धांत प्रस्तुत किया था।
उन्होंने बताया कि:
- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जब साम्यवाद और पूंजीवाद का प्रभाव बढ़ रहा था, तब उन्होंने भारतीय संस्कृति आधारित विचारधारा को आगे रखा।
- राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत इकाई है।
- राजनीति धर्म और नैतिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।
- अर्थव्यवस्था अंत्योदय के सिद्धांत पर आधारित हो, जिससे अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचे।
चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खाद्यान सुरक्षा योजना, कौशल उन्नयन, स्वनिधि योजना और हेल्थ स्मार्ट कार्ड जैसी योजनाएं इसी सोच से प्रेरित हैं।
🇮🇳 संघर्ष से समर्पण तक का जीवन
सांसद संतोष पाण्डेय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने गरीबी और अभाव के बीच शिक्षा पूरी की। प्रशासनिक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने नौकरी न कर राष्ट्रसेवा को प्राथमिकता दी।
उनके जीवन की प्रमुख बातें:
- 1937 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े
- अपने प्रमाण पत्र जलाकर स्वयं को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया
- ‘पांचजन्य’, ‘राष्ट्रधर्म’ और ‘स्वदेश’ पत्रों के संपादक रहे
- अंत्योदय और स्वदेशी का संदेश दिया
🔔 समर्पण दिवस का संदेश
कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों को जीवन में उतारें।
समर्पण दिवस केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उनके सिद्धांतों को व्यवहार में लाने का संकल्प दिवस है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अंत्योदय के विचार आज भी राजनीति और समाज के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहे हैं।