राज्यसभा चुनाव
राज्यसभा के चुनाव में भाजपा ने कई अहम दांव खेले हैं। पार्टी ने बिहार, बंगाल, असम, और ओडिशा से कुल 9 उम्मीदवारों को नामित किया है, जिनमें से कई नेता पार्टी के संगठन में लंबे समय से कार्यरत रहे हैं। इस बार भाजपा की रणनीति खासतौर पर राज्यसभा चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत करने की है, खासकर बिहार और बंगाल में।
भाजपा ने किसे दिया राज्यसभा का टिकट?
भा.ज.पा. ने राज्यसभा में भेजने के लिए जिन नेताओं को चुना है, उनमें कई पुराने पार्टी कार्यकर्ता और राज्य के मंत्री शामिल हैं। ये सभी राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाएंगे। आइए जानते हैं पार्टी ने किसे चुना है:
- नितिन नवीन: बिहार से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। नितिन पहले बिहार सरकार में मंत्री थे, लेकिन अब उन्होंने विधानसभा की बजाय राज्यसभा का रास्ता चुना है। उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
- शिवेश कुमार: बिहार भाजपा के महामंत्री शिवेश कुमार को भी राज्यसभा का टिकट मिला है।
- राहुल सिन्हा: पश्चिम बंगाल से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा को राज्यसभा में भेजा जाएगा। उनका संबंध कायस्थ समाज से है, जो बंगाल में एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है।
- लक्ष्मी वर्मा: छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेजा जाएगा।
- जोगेन मोहन और तेराश गोवाला: असम की दो राज्यसभा सीटों के लिए पथ निर्माण मंत्री जोगेन मोहन और विधायक तेराश गोवाला को उम्मीदवार बनाया गया है।
- मोहनलाल सामल: ओडिशा से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल सामल को कैंडिडेट बनाया गया है।
- सुजीत कुमार: ओडिशा से सुजीत कुमार को फिर से राज्यसभा का टिकट मिला है।
- संजय भाटिया: हरियाणा से संजय भाटिया को राज्यसभा भेजा जाएगा। वे पहले लोकसभा के सांसद रहे हैं।
बंगाल चुनाव और भाजपा की रणनीति
पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं, और भाजपा ने राहुल सिन्हा को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है। उनका संबंध कायस्थ समाज से है, जो बंगाल में एक बड़ा वोट बैंक है। भाजपा इस वर्ग को लुभाने की पूरी कोशिश कर रही है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की स्थिति मजबूत हो।
राहुल सिन्हा को राज्यसभा में भेजने से भाजपा को उम्मीद है कि वह टीएमसी के वोटरों को आकर्षित कर सकेगी, जो अब तक कायस्थ समाज को अपनी तरफ करने में असफल रही है।
बिहार में मुकाबला और भी रोचक
बिहार में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए ने राज्यसभा चुनाव में अपने कैंडिडेट की लिस्ट में पांचवां नाम जोड़ दिया है। उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए का पांचवां कैंडिडेट बनाया गया है, जिससे चुनाव का मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है। इस बार बिहार में जेडीयू ने अपने नेता निशांत कुमार को राजनीति में उतारने का फैसला लिया है।
- एनडीए की रणनीति: बिहार में एनडीए को अपनी बहुमत पर भरोसा था, लेकिन पांचवां कैंडिडेट मैदान में उतारने से मुकाबला काफी कड़ा हो गया है।
भाजपा की चुनावी रणनीति
- राज्यसभा में सत्तारूढ़ दल की बढ़त: भाजपा का उद्देश्य राज्यसभा में अपनी सत्तारूढ़ स्थिति को मजबूत करना है। इसके लिए पार्टी ने पुराने नेताओं को राज्यसभा में भेजा है, जो संगठन में काम कर चुके हैं और जिनकी देशभर में एक बड़ी पहचान है।
- राज्य की बजाय केंद्रीय राजनीति: पार्टी ने ऐसे नेताओं को चुना है जिनकी सेवाओं की अब केंद्रीय राजनीति में भी आवश्यकता हो सकती है।