असम चुनाव में 40 सीटों पर भाजपा की पूरी उम्मीद: ‘असमिया पहचान’ को लेकर जुटी पार्टी, PM मोदी की सक्रियता

असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी जीत के लिए खास रणनीति बनाई है और वह विशेष ध्यान 40 सीटों पर दे रही है, जो असम के ऊपरी इलाकों में स्थित हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वयं चाय बागान क्षेत्र तक यात्रा की और यहां के मजदूरों से संवाद करते हुए भाजपा के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश की है। इन सीटों पर भाजपा की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि ‘असमिया पहचान’ की राजनीति से यहां के मतदाता भाजपा के साथ जाएंगे।

40 सीटों पर भाजपा को क्यों है भरोसा?

  • भारी ‘असमिया पहचान’ की राजनीति: भाजपा का मानना है कि असम के ऊपरी इलाकों में रहने वाले असम के मूल लोगों के बीच पहचान की राजनीति ज्यादा असरदार हो सकती है। इन क्षेत्रों में बाहरी लोगों की बसावट और बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा भी प्रमुख है, जो भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा बन चुका है।
  • 2021 के परिणाम: 2021 के चुनावों में इन 40 सीटों में से कांग्रेस को केवल 5 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा का दावा है कि सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर किया और करीब डेढ़ लाख बीघा भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। भाजपा के अनुसार, इस कदम ने स्थानीय लोगों में एक भरोसा पैदा किया है, जो अब उनकी मदद कर सकता है।
  • वोटर लिस्ट में बदलाव: असम में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर करेक्शन किए गए हैं। इसके चलते भाजपा को उम्मीद है कि इन क्षेत्रों में पहचान की राजनीति को और बल मिलेगा, जो उसे और मजबूती दे सकता है।

संगठन में बदलाव और नए चेहरे

  • नए चेहरे और टिकट वितरण: भाजपा ने अपने संगठन में बड़े बदलाव किए हैं और 19 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है। इसके बजाय नए चेहरों को उतारा गया है, ताकि एंटी-इनकंबेंसी का असर कम किया जा सके और भाजपा को क्षेत्रीय समस्याओं का हल पेश करने का मौका मिले।
  • ऊपरी असम के प्रमुख जिले: भाजपा ने जिन 40 सीटों को फोकस किया है, उनमें शिवसागर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, धेमाजी, गोलाघाट, लखीमपुर, तिनसुकिया, और बिस्वनाथ जैसे जिले शामिल हैं। इन जिलों में भाजपा का दावा है कि ‘असमिया पहचान’ के मुद्दे पर स्थानीय मतदाता भाजपा के पक्ष में वोट देंगे।

भाजपा का घोषणा पत्र और इरादे

भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में ‘असमिया पहचान’ को प्रमुख मुद्दा बनाया है। उसने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) लागू करने का वादा किया है और स्थानीय पहचान को बचाए रखने के लिए कई कदम उठाने का संकल्प लिया है। पार्टी ने यह भी कहा है कि असम के मूल निवासी और संस्कृति की सुरक्षा के लिए उसे सत्ता में लौटने का मौका दिया जाए।

कांग्रेस का गठबंधन और भाजपा के मुकाबले का माहौल

  • कांग्रेस का गठबंधन: कांग्रेस ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए सीपीएम, सीपीआई, असम जातीय परिषद और रायजोर दल जैसे स्थानीय दलों से गठबंधन किया है। कांग्रेस का मानना है कि इन गठबंधनों से वह असम के विभिन्न वर्गों को अपने साथ जोड़ सकती है।
  • भाजपा के ‘असमिया पहचान’ पर फोकस: कांग्रेस का यह गठबंधन भाजपा के लिए एक चुनौती पेश कर सकता है, लेकिन भाजपा का रणनीति पर केंद्रित रहना और ‘असमिया पहचान’ को मजबूत मुद्दा बनाना पार्टी के लिए बड़ा फायदेमंद हो सकता है। भाजपा को लगता है कि इस मुद्दे पर वह फिर से अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में सफल होगी।

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