कांग्रेस-भाजपा दोनों ने सिर्फ वादे किए, पंचायत सचिव आज भी संघर्षरत

आदेश की कॉपी जलाकर जताया आक्रोश, भाजपा सरकार ने भी नहीं निभाया अपना वादा

राज्य में पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। अपनी मांगों को लेकर अड़े सचिवों ने सरकार के आदेश की कॉपी जलाकर विरोध जताया और साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सचिवों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होंगे।

वादों की राजनीति में फंस गए पंचायत सचिव, कोई नहीं कर रहा समस्या का समाधान

दरअसल, पंचायत सचिवों की मांगें नई नहीं हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान भी सचिवों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी मांगे पूरी की जाएंगी, लेकिन वादा धरातल पर नहीं उतर पाया। इसके बाद भाजपा सरकार ने भी चुनावी मंच से पंचायत सचिवों के पक्ष में बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थीं। सचिवों को भरोसा दिलाया गया था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो उनकी मांगों पर प्राथमिकता से फैसला लिया जाएगा। लेकिन अब 2025 आ गया है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सचिवों का गुस्सा भड़का, सरकार को दी चेतावनी

पंचायत सचिवों का गुस्सा अब चरम पर है। उनका कहना है कि सरकारें सिर्फ चुनाव के वक्त वादे करती हैं और सत्ता में आने के बाद पीछे हट जाती हैं। पंचायत संचालनालय की संचालक प्रियंका ऋषि महोबिया ने आदेश जारी कर हड़ताल समाप्त करने का अल्टीमेटम दिया है, लेकिन सचिवों ने साफ कर दिया कि वे झूठे आश्वासनों से अब गुमराह नहीं होंगे।

क्या हैं पंचायत सचिवों की मांगें?

पंचायत सचिवों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, भत्तों का भुगतान और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। वे चाहते हैं कि सरकार उनके अधिकारों को सुनिश्चित करे और उनकी सेवाओं को स्थायी किया जाए। सचिवों का कहना है कि वे गांवों के विकास की रीढ़ हैं, लेकिन सरकारें उन्हें नजरअंदाज कर रही हैं।

अब क्या होगा?

सरकार और पंचायत सचिवों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सचिवों ने सरकार को दो टूक कह दिया है कि अगर जल्द उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे भूख हड़ताल पर बैठने के साथ-साथ उग्र आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन को शांत कराने के लिए क्या कदम उठाती है।

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