बारिश में पुल का फिर टूटना: तीन गांव टापू बनकर रह गए, आवागमन ठप, ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का लगाया आरोप

मोहला-मानपुर. इंजीनियर और ठेकेदार की मनमानी व घटिया निर्माण का खामियाजा क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ रहा. लगातार तीन दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते कोराचा-बुकमरका मार्ग पर गट्टेगहन नदी पर बना पुल टूटने से आवागमन ठप हो गया है. बच्चों का स्कूल आना-जाना बंद हो गया है. संबलपुर स्थित पुलिस कैंप से मुख्यालय का संपर्क टूट गया है. पुल टूटने से संबलपुर, बुकमरका, सुड़ियाल गांव टापू में तब्दील हो चुका है. कई राहगीर नदी के उस पार फंसे हुए हैं. बता दें कि तीसरी बार यह पुल टूटा है.

ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ के ऊपर महाराष्ट्र सीमा पर बसे नक्सल प्रभावित बुकमरका व सुड़ियाल गांव को मुख्यालय से जोड़ने पुल का निर्माण किया गया था. गुणवत्ताविहीन निर्माण के चलते बीते दो साल में गट्टेगहन नदी पर बना पुल तीसरी बार टूटा है. पिछले साल भी बारिश में दो बार पुल टूटा था. अभी हाल ही में माहभर पहले पुल की मरम्मत की गई थी. घटिया निर्माण के चलते तीसरी बार पुल टूटा है.

पिछले साल भी बारिश के समय गट्टेगहन नदी पर बना पुल टूटा था.

सांसद, डिप्टी सीएम ने कार्रवाई का दिया था आश्वासन पर कुछ नहीं हुआ

पिछली बार पुल टूटने पर भी ठेकेदार और इंजीनियर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. सांसद संतोष पांडे, डिप्टी सीएम विजय शर्मा को पिछले साल ही पुल निर्माण में भारी भ्रष्टाचार से अवगत कराया गया था. तब सांसद और डिप्टी सीएम ने गुणवत्तायुक्त निर्माण करवाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही थी पर न गुणवत्तायुक्त निर्माण हुआ और न ही जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई हुई. नतीजा फिर से पुल टूटने से क्षेत्रवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा.

दो साल पहले हुआ था सड़क और पुल का निर्माण

बता दें कि दो साल पहले ही पीएमजीएसवाय के तहत कोराचा से बुकमरका के बीच सड़क व पुल का निर्माण हुआ था. निर्माण के बाद सालभर के भीतर ही सड़क उखड़ने लगी थी. पुल भी टूट गए. मार्ग पर बने और भी अन्य पुल क्षतिग्रस्त होकर टूटने की कगार पर है.

ठेकेदार को टूटे पुल को तत्काल बनाने कहा है : एसडीओ

इस मामले में पीएमजीएसवाय के एसडीओ विजय सोनी ने कहा कि पुल टूटने की जानकारी मिली है. ठेकेदार को तत्काल बनवाने कहा गया है. पानी छोड़ने के बाद टूटे पुल को बनवा दिया जाएगा. वहीं एसडीओ ने दो साल में तीन बार पुल टूटने के बावजूद भी इंजीनियर व ठेकेदार पर कार्रवाई न होने को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं दिया. इससे प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अफसर साइड इंजीनियर व ठेकेदार पर कार्रवाई न कर उन्हें संरक्षण दे रहे हैं.

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