अयोध्या मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और दो डॉक्टर समेत 12 पर मुकदमा, जानिए पूरा मामला

अयोध्या में राजर्षि दशरथ मंडलीय चिकित्सालय दर्शन नगर अयोध्या के प्राचार्य, दो डॉक्टर तथा 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना करने का आदेश कोतवाल अयोध्या को दिया गया है। यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंशुमाली पांडेय की अदालत से बुधवार को हुआ है। अधिवक्ता मार्तंड प्रताप सिंह ने बताया कि हैदरगंज थाना क्षेत्र के बिंदा मिश्र का पूरा पछियाना निवासी जगदीश चंद्र मिश्र का पुत्र प्रभुनाथ मिश्रा राजर्षि दशरथ राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर 2019 से कार्यरत था। बीते 29 जुलाई को सुबह 11.30 वह अपनी ड्यूटी पर था।

इस समय मेडिकल कॉलेज की 2020 बैच की छात्राओं रितु एवं निर्मला कुमावत बलपूर्वक बिना लाइन के उसकी केबिन के अंदर घुसकर रजिस्ट्रेशन पर्चा काटने का प्रयास व दबाव बनाने लगी। जब प्रभु नाथ ने दोनों से लाइन में लगकर परचा कटवाने को कहा तो इस पर वह दोनों 10-12 अज्ञात असामाजिक तत्वों व अन्य अज्ञात डॉक्टर के साथ मौके पर आ गईं और प्रभु नाथ को मारा पीटा। घर पहुंचने पर उसने अपने पिता से पूरी बात बताया और शिकायत मेडिकल कॉलेज प्रशासन से भी किया। इस संबंध में जांच कमेटी बनाई गई। आरोप है कि जांच कमेटी ने मामला विभागीय होने के नाते कोई कार्यवाही नहीं की। इसके बाद रितु व निर्मला कुमावत उनके गैंग के सहयोगी डॉक्टरों द्वारा शिकायत वापस लेने व माफी मांगने के लिए गाली गलौज व जानलेवा धमकी दी गई।

इसकी शिकायत प्राचार्य ज्ञानेंद्र कुमार से किया तो उन्होंने प्रभु नाथ को अपने कमरे में बुलाकर दोनों छात्राओ से माफी मांगने को कहा। अन्यथा की दशा में छेड़खानी व अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा कायम करवाने की धमकी दी। माफी न मांगने पर प्राचार्य ज्ञानेंद्र कुमार ने सात अगस्त 2024 को प्रभु नाथ को बुलाकर माफी ना मांगने पर नौकरी से निकलवा देने और झूठे मुकदमे में फंसा कर जेल भिजवा देने की धमकी दी। इससे तंग आकर प्रभु नाथ ने उसी दिन अपनी जीवन लीला समाप्त करने की नीयत से जहर खा लिया।

आरोप है कि उसके इलाज में भी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने लापरवाही की और उसे मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ पहुंचने पर डॉक्टरों ने आठ अगस्त को उसे मृत घोषित कर दिया। मृत्यु की संभावना की जानकारी होने पर साजिश करके झूठी घटना दिखाकर प्रभु नाथ मिश्रा का गलत नाम रघुनाथ मिश्रा दर्शा कर एक अन्य सहयोगी को भी सह अभियुक्त बनाकर अश्लील हरकत और धमकी देने की धारा में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई। इस मामले में पुलिस ने कोई रिपोर्ट नहीं दर्ज की। तब मृतक के पिता ने अदालत में रिपोर्ट दर्ज करने की अर्जी दी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना करने तथा परिणाम से न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया है।

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