कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर केस में गिरफ्तार आरोपी के पॉलीग्राफ टेस्ट की इजाजत सीबीआई को मिल गई है।

कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर केस में गिरफ्तार आरोपी के पॉलीग्राफ टेस्ट की इजाजत सीबीआई को मिल गई है। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार टेस्ट कराने की अनुमति तो मिल गई है, लेकिन यह कब होगा इस बारे में अभी तक कोई भी जानकारी निकल कर सामने नहीं आई हैं। इस रेप और हत्याकांड के मामले मे अभी तक कई एंगल निकल कर सामने आ रहे हैं। पीड़िता के माता-पिता ने इसमें साथी डॉक्टरों के भी शामिल होने का शक जताया है। पीड़िता के पिता ने कहा कि यह सब होने के पहले भी मेरी बेटी परेशान थी, उसने इसकी शिकायत कॉलेज प्रबंधन से की थी लेकिन कोई समाधान नहीं हो सका, जिन भी लोगों पर हमें शक है उनके नाम हमने सीबीआई को दे दिए हैं। कुछ न्यूज रिपोर्टों के अनुसार, इस रेप और हत्याकांड के तार किसी बड़े मानव अंग तस्करी गिरोह और सेक्स रैकेट से भी जुड़े हुए हो सकते हैं। सीबीआई लगातार इस मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से इस मामले में पिछले चार दिनों से पूछताछ जारी है।

इस मामले की गंभीरता को समझते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान ले लिया है और इस केस की सुनवाई अब चीफ जस्टिस चंद्रचूड के नेतृत्व वाली बेंच 20 अगस्त को करेगी। इससे पहले यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में चल रहा था।

इस घटना के बाद से ही बंगाल के साथ- साथ पूरे देश की राजनीति उबाल पर है। भाजपा और वामदलों ने इस घटना के लिए ममता बनर्जी सरकार को दोषी ठहराया तो वहीं ममता ने इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति न करने को कहा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए कई लोगों ने पीड़िता का नाम और पहचान उजागर की, कोलकाता पुलिस की तरफ से अफवाह फैलाने वालों और गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों को नोटिस जारी किया जा रहा है इस मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसके विरोध में रैली निकाल कर प्रदर्शन किया और सीबीआई को जल्द से जल्द मामला खत्म करने और दोषी को फांसी पर लटकाने की मांग की।

 इससे पहले, कोलकाता के आरजी कर मेडीकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया और उसकी हत्या कर दी गई थी। 9 अगस्त को महिला डॉक्टर का शव अस्पताल के ही एक सेमिनार हॉल में मिला था, जिसके बाद से ही लगातार प्रदर्शनों का दौर जारी है। पुलिस ने जांच के आधार पर अस्पताल में ही काम करने वाले एक नागरिक स्वयंसेवक संजय राय को गिरफ्तार किया, जिसने बाद में अपने जुर्म को कबूल भी कर लिया। पुलिस की जांच में देरी और अनियमितताओं के चलते कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई द्वारा सही से जांच शुरू हो उसके पहले ही कुछ असामाजिक तत्वों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के ऊपर हमला कर दिया और अस्पताल में भी तोड़फोड़ की, जिसके बाद लोगों का गुस्सा और तेज हो गया। पुलिस ने जब इस हमले में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया तो उन्होंने खुद की मर्जी से वहां आने की बात बोली लेकिन पुलिस ने किसी भी तरह की कोई साजिश होने से इंकार नहीं किया। कोलकाता पुलिस ने कहा कि इसमें साजिश हो सकती है हम इसकी जांच कर रहे हैं।

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