CGPSC, बायलर इंस्पेक्टर, नियुक्ति गड़बड़ी, राज्यपाल शिकायत, छत्तीसगढ़
लेख:
रायपुर:
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) एक बार फिर सुनियोजित गड़बड़ी के आरोपों में घिरता हुआ नजर आ रहा है। इस बार मामला उद्योग विभाग में बायलर इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति से जुड़ा है, जिसमें भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने राज्यपाल से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
क्या है मामला?
मुद्दा कानन वर्मा नामक अभ्यर्थी की बायलर इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति से जुड़ा है, जिनकी योग्यता पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि वह आयु सीमा से अधिक थे, बावजूद इसके उन्हें चयनित कर लिया गया। यह मामला तब गरमा गया जब साकेत अग्रवाल नामक दूसरे अभ्यर्थी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय देते हुए उन्हें नियुक्ति देने का आदेश दिया।
हाई कोर्ट का यह निर्णय CGPSC द्वारा अभी तक नहीं माना गया है, जिससे मामला और भी पेचीदा हो गया है।
भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास का आरोप:
भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने CGPSC के कार्य में गड़बड़ी की बात करते हुए राज्यपाल श्रीमती अनुसुईया उइके से शिकायत की है। श्रीवास ने आरोप लगाया कि लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों की भूमिका संदिग्ध है, जिनकी नियुक्ति पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में की गई थी। इन सदस्यों में प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान और सरिता उइके शामिल हैं।
प्रवीण वर्मा और कानन वर्मा का संबंध:
श्रीवास ने आरोप लगाया कि प्रवीण वर्मा का कानन वर्मा से व्यक्तिगत संबंध हो सकता है, जिससे न्यायिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं। उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर इन तीनों सदस्यों को तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
पूर्व के घोटाले और संदिग्ध गतिविधियाँ:
श्रीवास ने इस मामले को घोटाले से भी जोड़ते हुए कहा कि पूर्व में भी इन तीनों सदस्यों की भूमिका पर सवाल उठ चुके हैं और अब उनके कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले की गहन जांच की जाए और किसी प्रकार के कुकृत्य को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
क्या कहते हैं आयोग के सदस्य?
हालांकि, इस मामले पर CGPSC या नियुक्ति समिति की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।