छत्तीसगढ़ बाल आयोग अलर्ट: 9 वर्षीय बच्ची से हुई मुलाकात, 22 जनवरी को पेश होगी जांच रिपोर्ट

बच्ची दुराचार मामला


बच्ची के साथ दुराचार मामले में बाल आयोग ने लिया कड़ा संज्ञान

रायपुर में सामने आए 9 वर्षीय बच्ची के साथ दुराचार की निंदनीय घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 14 जनवरी को प्रकरण दर्ज किया और 4 अहम बिंदुओं पर जांच का आदेश जारी किया। इन बिंदुओं में शामिल हैं:

  • बच्ची के स्वास्थ्य और उपचार की स्थिति
  • मानसिक परामर्श की व्यवस्था
  • पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना
  • मामले की न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया की निगरानी

बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने की पीड़िता से मुलाकात

इस मामले की अद्यतन जानकारी लेने के लिए 17 जनवरी को बाल आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा आईसीपीएस टीम, बाल कल्याण समिति और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ पीड़िता के निवास पर पहुंची।

  • डॉ. शर्मा ने बच्ची और उसके परिजनों से संवेदनशीलता और सम्मान के साथ बातचीत की।
  • बच्ची को मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराया गया।
  • परिवार को पूर्ण सहयोग और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया गया।

जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया

  • बाल आयोग ने सीडब्ल्यूसी (Child Welfare Committee) से 22 जनवरी तक प्रत्येक स्तर पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
  • आयोग ने नाराजगी जताते हुए थाना स्तर से रिपोर्ट न मिलने पर सवाल उठाया।
  • पीड़िता के अत्यावश्यक उपचार के लिए जिला बाल संरक्षण अधिकारी, संबंधित थाना प्रभारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश जारी किए गए।

बच्ची की सुरक्षा और सहायता

बाल आयोग ने यह सुनिश्चित किया कि:

  • पीड़िता और परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
  • बच्ची का उपचार स्त्री रोग विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक सहायता के माध्यम से हो।
  • बच्ची को अस्पताल में पूर्ण देखरेख में रखा गया है।

अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट किया कि आयोग हर स्तर पर सहयोग करेगा और बच्ची के सर्वोत्तम हित की रक्षा करेगा।


गोपनीयता और मीडिया से अपील

डॉ. शर्मा ने मीडिया, जनप्रतिनिधियों और आम जनता से कठोर अनुरोध किया कि पीड़िता की पहचान उजागर न की जाए, अन्यथा यह POCSO Act का उल्लंघन माना जाएगा।

  • 📌 POCSO Act के तहत मामले की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है।
  • 📌 किसी भी तरह की पहचान उजागर करना कानूनी अपराध होगा।

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