दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को बस मार्सलों के रोजगार को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच खूब आरोप प्रत्यारोप हुआ। आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने एक दूसरे पर 10 हजार बस मार्सलों को बेरोजगार करने का आरोप लगाया। दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने भी विस्तार से अपनी बात रखी। हालांकि, इस दौरान मुख्यमंत्री एक चूक भी कर गईं। उन्होंने कहा कि निर्भया के साथ एक डीटीसी बस में दरिंदगी हुई थी, जबकि सच्चाई इससे अलग है।
मुख्यमंत्री आतिशी ने विधानसभा में बस मार्सलों की नियुक्ति और उनका रोजगार छिन जाने पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद, अरविंद केजरीवाल जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद, और तब कुछ समय पहले निर्भया कांड हुआ था, डीटीसी बस में ही हुआ था।’ यहीं पर वह एक चूक कर गईं। उन्होंने कहा कि निर्भया के साथ डीटीसी बस में वारदात हुई, जबकि यह एक निजी बस थी।
घटना 16 दिसंबर 2012 में हुई थी। तब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी। निर्भया अपने एक दोस्त के साथ अपस्केल मॉल में सिनेमा देखने के बाद घर लौट रही थी। रात के समय करीब साढ़े आठ बजे वह दोस्त के साथ सफेद रंग की चार्टर बस में मुनिरका में सवार हुई थी, जिसका नंबर था DL 1PC 0149। ‘यादव ट्रेवल्स’ की उस बस में पहले से 6 लोग सवार थे।
निर्भया के दोस्त को बंधक बनाने के बाद उसके साथ दरिंदगी की गई थी। बाद में उसे बेहोशी की हालत में सड़क किनारे फेंककर दोषी फरार हो गए। इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। यह बस सुबह शाम नोएडा से सवारी लेकर दिल्ली जाती थी। बस में एक निजी स्कूल के विद्यार्थियों को भी ले जाती थी। बस का मालिक दिनेश यादव नाम के शख्स थे और चाक रामसिंह था।