सीएम योगी
खेल से राष्ट्र निर्माण का संदेश: सीएम योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं और शिक्षा संस्थानों को लेकर एक दूरदर्शी संदेश दिया है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आह्वान किया कि वे कम से कम एक खेल को गोद लें और उसी खेल से जुड़ी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें निखारें। मुख्यमंत्री का मानना है कि खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है।
सीएम योगी यह संदेश दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में दे रहे थे।
🏀 “युवा खेलेगा, तभी खिलेगा”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि:
- खेल युवाओं को नशे और सामाजिक विकृतियों से दूर रखते हैं
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से खेल भावना और अनुशासन विकसित होता है
- खेलों से जुड़े युवा ही 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे
उन्होंने स्पष्ट कहा,
“युवा खेलेगा तो खिलेगा, और वही युवा देश को आगे बढ़ाएगा।”
🏟️ उत्तर प्रदेश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा विस्तार
सीएम योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में खेलों को लेकर बड़े पैमाने पर काम हुआ है:
- 🏫 मेरठ में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी
- 🏏 हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान और ओपन जिम
- 🏟️ ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, जिला स्तर पर बड़े स्टेडियम
- 🎒 96,000 से अधिक युवक और महिला मंगल दलों को स्पोर्ट्स किट
इन प्रयासों का उद्देश्य है कि खेल गतिविधियां औपचारिक आयोजन न रहकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनें।
🥇 खिलाड़ियों के लिए इनाम, नौकरी और सम्मान
सरकार की खेल नीति खिलाड़ियों को भविष्य की सुरक्षा भी देती है:
- 🏅 ओलंपिक में भाग लेने पर ₹10 लाख प्रोत्साहन राशि
- 🥇 ओलंपिक एकल स्वर्ण पदक पर ₹6 करोड़ + क्लास वन नौकरी
- 🥈 रजत पदक पर ₹3 करोड़, कांस्य पर भी नकद पुरस्कार
- 👮♂️ अब तक 500+ पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी
- DSP, तहसीलदार और क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी जैसे पदों पर नियुक्ति
🇮🇳 2030 और 2036 की तैयारी का आह्वान
सीएम योगी ने बताया कि:
- 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स गुजरात में होंगे
- भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए प्रयासरत है
ऐसे में राज्यों, संस्थानों और खिलाड़ियों को अभी से वैश्विक स्तर की तैयारी करनी होगी।
🧘♂️ भारत की परंपरा और खेल
मुख्यमंत्री ने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा:
- “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्”
- स्वस्थ शरीर से ही धर्म, कर्तव्य और राष्ट्र सेवा संभव है
- खेलों से संयम, नियम और आत्मनियंत्रण आता है
उन्होंने यह भी खुशी जताई कि अब बेटा-बेटी में भेदभाव कम हुआ है और परिवार खेल में बच्चों को बराबर प्रोत्साहन दे रहे हैं।