DBR कंपनी का CMD मनीष जाएगा जेल, 200 से अधिक लड़कियों के यौन शोषण का है आरोपी

बिहार के चर्चित ठगी-यौन शोषण कांड में बड़ा एक्शन होने वाला है। सैकड़ों युवक युवतियों से नौकरी के नाम पर ठगी और यौन शोषण के मामले में आरोपित डीबीआर यूनिक नेटवर्किंग कंपनी के निदेशक गोपालगंज जिले के मनीष सिन्हा की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया गया है। मुजफ्फरपुर सीजेएम कोर्ट से अहियापुर थाने के दारोगा केस के आईओ जितेंद्र महतो ने वारंट प्राप्त कर लिया है। अब गोपालगंज के नगर थाना के कररिया गांव निवासी मनीष की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम नोएडा स्थित उसके अस्थाई आवास जाएगी। गोपालगंज स्थित उसके घर पर पुलिस टीम ने छापेमारी की, लेकिन वह नहीं मिला।

अहियापुर थाना में छपरा की पीड़ित किशोरी के परिवाद पर बीते दो जून को एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें पीड़िता ने बताया कि सैकड़ों युवक-युवतियों से नौकरी के नाम पर ठगी की गई है। 200 से अधिक युवतियों व किशोरियों का शोषण हुआ है। पीड़िता ने कई युवतियों को गवाही के लिए पुलिस के समक्ष प्रस्तुत भी किया। मीनापुर की युवती ने कैमरा के सामने खुलकर बताया कि उसके साथ भी ठगी व यौन शोषण किया गया था। पीड़िता ने डीबीआर के प्रशिक्षण केंद्र में युवतियों के साथ मारपीट और यौन शोषण का वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत किया। मामले में एफआईआर के बाद पुलिस ने गोपालगंज से तिलक सिंह और उत्तर प्रदेश के बलिया से अजय प्रताप को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

दोनों अभी जेल में बंद हैं। तिलक की जमानत अर्जी हाइकोर्ट से बीते 25 सितंबर को खारिज हो चुकी है। वहीं, अजय प्रताप की अर्जी पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति संदीप कुमार सुनवाई करेंगे। गिरफ्तारी से बचने के लिए मनीष ने कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी डाली थी। इसे जिला कोर्ट से खारिज किया जा चुका है। इस केस के अन्य आरोपितों के संबंध में सुपरवीजन रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि उनके अभियुक्तिकरण पर साक्ष्य के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

डीबीआर नेटवर्किंग कंपनी का एमडी मनीष सिन्हा इन दिनों उत्तर प्रदेश के नोएडा, लखनऊ और राजस्थान के जयपुर में अपना ठिकाना बना रखा है। वह लगातार सोशल मीडिया एकाउंट पर सक्रिय है। अलग-अलग जगहों और नेताओं के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट कर रहा है। उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। चर्चा है कि उसने डीबीआर का नाम बदलकर दूसरी कंपनी जयपुर में खड़ी कर ली है। उस कंपनी में भी नौकरी के नाम पर ठगी का शिकार बनाए जाने का आरोप लग रहा है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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