संपूर्णता अभियान 2.0
संपूर्णता अभियान 2.0: विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की नई शुरुआत
नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू हुआ संपूर्णता अभियान 2.0 एक राष्ट्रव्यापी जन-अभियान है, जिसका उद्देश्य देश के सबसे पिछड़े जिलों और ब्लॉकों में विकास से जुड़े प्रमुख संकेतकों की शत-प्रतिशत संतृप्ति सुनिश्चित करना है। यह अभियान 28 जनवरी 2026 से 14 अप्रैल 2026 तक पूरे देश में संचालित किया जाएगा।
कांकेर जिला भी अभियान में शामिल
छत्तीसगढ़ का आकांक्षी जिला कांकेर इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिले के दो आकांक्षी ब्लॉक—
- कोयलीबेड़ा
- दुर्गुकोंदल
को विशेष रूप से अभियान में शामिल किया गया है, जहाँ स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और कृषि से जुड़े लक्ष्यों को मिशन मोड में पूरा किया जाएगा।
क्या है संपूर्णता अभियान 2.0 का उद्देश्य?
संपूर्णता अभियान 2.0 का मूल लक्ष्य है—
“अंतिम छोर पर खड़े हर पात्र नागरिक तक सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ पहुँचाना।”
इसके लिए अभियान में मजबूत विभागीय अभिसरण, डेटा आधारित निगरानी और जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।
आकांक्षी ब्लॉकों के प्रमुख विकास संकेतक
कोयलीबेड़ा और दुर्गुकोंदल ब्लॉकों में निम्नलिखित संकेतकों पर विशेष फोकस किया जा रहा है:
👶 स्वास्थ्य और पोषण
- 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित पूरक पोषण
- आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की माप एवं पोषण निगरानी
- आंगनवाड़ी केंद्रों में
- कार्यशील शौचालय
- स्वच्छ पेयजल सुविधा
🏫 शिक्षा
- विद्यालयों में बालिका शौचालय सुविधा का प्रतिशत बढ़ाना
- बच्चों की नियमित उपस्थिति और आधारभूत सुविधाएँ सुनिश्चित करना
🐄 कृषि एवं पशुपालन
- गोवंश पशुओं का एफएमडी (FMD) टीकाकरण शत-प्रतिशत करना
- पशुपालकों को जागरूक कर पशुधन संरक्षण को मजबूत बनाना
संपूर्णता अभियान 1.0 से मिली सीख
संपूर्णता अभियान 1.0 के दौरान देशभर में उल्लेखनीय परिणाम सामने आए थे।
- कई आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों ने
- स्वास्थ्य
- पोषण
- शिक्षा
- कृषि
के क्षेत्रों में पूर्ण या आंशिक संतृप्ति हासिल की।
इन्हीं सफल अनुभवों को आधार बनाकर अभियान 2.0 को और अधिक केंद्रित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया गया है।
जनभागीदारी से बदलेगी तस्वीर
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है—
- स्थानीय प्रशासन
- विभिन्न विभाग
- जनप्रतिनिधि
- और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी
जब समुदाय खुद विकास का हिस्सा बनता है, तब योजनाएँ कागज़ से निकलकर ज़मीन पर असर दिखाती हैं।