बस्तर: संस्कृति का संगम और विकास की नई सुबह – अमित शाह ने किया बस्तर पंडुम 2026 का उद्घाटन

बस्तर पंडुम 2026


जगदलपुर: बस्तर पंडुम 2026 का भव्य समापन समारोह

जगदलपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में बस्तर पंडुम 2026 का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इस आयोजन ने बस्तर की जनजातीय संस्कृति और समृद्ध परंपरा को नई पहचान दी है।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर भारत की सांस्कृतिक धरोहर है और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं जैसे धरती आबा और पीएम जनमन योजना के माध्यम से संरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 53 हजार से अधिक कलाकारों ने 12 पारंपरिक विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।


🔹 बस्तर पंडुम: संस्कृति का उत्सव

  • आयोजन में 32 जनपद पंचायतों और 1885 ग्राम पंचायतों के कलाकारों ने भाग लिया।
  • प्रतिभागियों को दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
  • 12 प्रमुख विद्याओं में प्रदर्शन शामिल था: लोकनृत्य, गीत, शिल्प, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नाटक, चित्रकला, खान-पान, वेशभूषा आदि।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान का उत्सव है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 47 हजार कलाकारों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस साल यह संख्या 54 हजार से अधिक थी।


🔹 विकास और नक्सलवाद पर खास ध्यान

  • अमित शाह ने कहा कि बस्तर में माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • नियद नेल्ला नार योजना के तहत अब 40 गांवों में स्कूल खुल गए हैं, और वहां गोलियों की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती हैं।
  • दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में 2.75 लाख एकड़ में सिंचाई और 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन परियोजना शीघ्र प्रारंभ।
  • रेल परियोजनाओं और नदी जोड़ो परियोजना से दूरस्थ अंचलों को मुख्यालयों से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब माओवादी की बजाय संस्कृति, पर्यटन और समृद्ध विरासत के लिए जाना जाएगा।


🔹 पर्यटन और रोजगार के नए अवसर

  • बस्तर जिले में 118 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र और पर्यटन को बढ़ावा।
  • धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र ने सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया।
  • ईको-टूरिज्म, होम-स्टे और ट्रेकिंग जैसी परियोजनाओं से पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा

🔹 नक्सल पुनर्वास और समाजिक सुरक्षा

  • आत्मसमर्पण नीति के तहत माओवादी छोड़कर लौटे लोगों का सम्मान और पुनर्वास
  • सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाई जा रही हैं।
  • सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर में शांति और विकास का नया युग प्रारंभ।

🔹 बस्तर की नई पहचान

  • बस्तर अब संभावनाओं की भूमि बन चुका है।
  • सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और जनजातीय कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाया जा रहा है।
  • मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का मार्गदर्शन बस्तर के सशक्त और विकसित भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

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