बाबू संपूर्णानंद के नाम पर बनारस में सियासत तेज, कांग्रेस ने दी चेतावनी; कायस्‍थ समाज ने बुलाई बैठक

स्‍वतंत्रता सेनानी और यूपी के दूसरे मुख्‍यमंत्री रहे बाबू संपूर्णानंद के नाम को लेकर वाराणसी में सियासत तेज हो गई है। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय ने कहा है कि बनारस में पुराने प्रतिष्ठित स्टेडियम के आधुनिक निर्माण के उद्घाटन के साथ, स्टेडियम से जुड़ा बाबू सम्पूर्णानंद का नाम हटा देना आपत्तिजनक और शर्मनाक ही नहीं, काशी और उसकी गौरवशाली विरासत का अपमान भी है। सरकार के इस निंदित काम से काशी के लाखों लोग आहत हुए हैं। काशीवासी दुखी हैं। उन्‍होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस इस अनैतिक काम का जहां तीव्र विरोध व्यक्त करती है, वहीं वह‌ इस विरोध को एक आंदोलन बनाने का काम भी करेगी। वहीं इस मुद्दे पर कायस्‍थ समाज ने भी विरोध जताया है। एक संगठन ने कायस्‍थ समाज के लोगों से एकजुट होने का आह्रवान किया है। बताया जा रहा है कि सोमवार शाम समाज के लोग एकजुट होकर इस संबंध में रणनीति बनाएंगे।

प्रदेश अध्‍यक्ष अजय राय ने कहा कि कांग्रेस इस अमर्यादित कृत्य का पुरजोर विरोध करती है। उन्‍होंने कहा कि सम्पूर्णानंद जैसे लोकप्रिय मनीषी राजनेता का नाम किसी प्रतिष्ठान से हटा दिया जाना महज उनका और काशीवासियों की भावनाओं का ही अपमान नहीं, बल्कि काशी की विद्वत आचार्य परम्परा और सत्य, त्याग, नैतिक मूल्यों, ईमानदारी आदि की एक आदर्श राजनीति की प्रेरणास्पद विरासत और आजादी की लड़ाई के सेनानियों का भी अपमान है। दुर्भाग्य से इसे सरकार में बैठे दल के लोग नहीं समझ पा रहे हैं।

अजय राय ने कहा कि यह एक विडंबना है कि जिन बाबू सम्पूर्णानंद ने बनारस का वैदिक नामकरण ‘वाराणसी’ किया उसी वाराणसी नाम की आड़ लेकर एक स्टेडियम संग सुस्थापित सम्पूर्णानंद जी का ही नाम हटा दिया गया। उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से बाबू सम्पूर्णानंद का नाम हटाने के मामले का संज्ञान लेने की मांग की। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री वाराणसी के लाखों लोगों के हुए दुख को समझें और सम्पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम का नाम फिर से बहाल करने का निर्देश दें। यह भूल सुधार नैतिक धर्म है और काशी की भावनाओं के सम्मान का तकाजा है।

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